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मोदी की सरकार पर राहुल गांधी का प्रहार

देश को फिर से राजतंत्र की तरफ धकेल रही यह सरकार

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सत्ता का केंद्रीयकरण करना चाहती है और ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों को छीनकर देश को उस पुराने युग में धकेलना चाहती है जहाँ सारी शक्ति और संपत्ति केवल कुछ गिने-चुने हाथों में सिमटी होती थी।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मनरेगा श्रमिकों के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो साझा करते हुए हिंदी में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, मोदी जी की मनरेगा को नष्ट करने की मंशा के पीछे क्या मकसद है? श्रमिकों से दिहाड़ी पर मोलभाव करने का अधिकार छीनना, पंचायतों के हाथ बांधकर उन्हें शक्तिहीन करना, राज्यों को कमजोर कर दिल्ली में सारी सत्ता केंद्रित करना और देश को फिर से राजा-महाराजाओं के उस दौर में वापस ले जाना, जहाँ सत्ता और धन कुछ ही लोगों के पास होता था।

कांग्रेस पार्टी सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लाई गई नई योजना विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) या वीबी जी राम जी का कड़ा विरोध कर रही है। राहुल गांधी ने दावा किया कि नया कानून ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को कमजोर कर रहा है और श्रमिकों को गुलाम बनाने जैसा है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा ने करोड़ों लोगों को सम्मान के साथ काम करने का अधिकार और न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी थी, जिसे हासिल करने में दशकों लगे थे, लेकिन अब सरकार इसे बुलडोजर से ढहा रही है। कांग्रेस ने इस बदलाव के खिलाफ 10 जनवरी 2026 से मनरेगा बचाओ संग्राम नामक 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया है।

यह आंदोलन 25 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें पंचायत स्तर पर चौपाल और जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। कांग्रेस की मांग है कि वीबी जी राम जी कानून को वापस लिया जाए और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। राहुल गांधी ने वीडियो में एक श्रमिक का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामीण भारत में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा और डर है कि उनकी कानूनी सुरक्षा छीनी जा रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था में यह केंद्र सरकार तय करेगी कि किसे और कहाँ काम मिलेगा, जिससे पंचायतों और ग्राम सभाओं की स्वायत्तता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।