गाजा बोर्ड की सदस्यता की फीस एक बिलियन डॉलर
वाशिंगटनः डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने लेन-देन आधारित कूटनीतिक दृष्टिकोण से विश्व को चौंका दिया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन एक ऐसी योजना पर विचार कर रहा है जिसके तहत गाजा पीस बोर्ड पर अपनी जगह सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक सदस्य राष्ट्र को 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है। यह कदम उनके अमेरिका फर्स्ट एजेंडे का विस्तार माना जा रहा है, जहाँ वे वैश्विक सुरक्षा और शांति प्रयासों के वित्तीय बोझ को पूरी तरह से अमेरिका के कंधों से हटाकर अन्य देशों पर डालना चाहते हैं।
ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका दशकों से दुनिया भर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने संसाधनों और सेना का उपयोग करता रहा है, जबकि अन्य धनी देश इसका मुफ्त लाभ उठाते हैं। 1 बिलियन डॉलर की यह मांग केवल एक सदस्यता शुल्क नहीं है, बल्कि इसे एक सुरक्षा प्रीमियम के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप का मानना है कि यदि कोई देश अंतरराष्ट्रीय निर्णयों और शांति वार्ताओं में एक सीट चाहता है, तो उसे उस शांति को बनाए रखने की लागत में अपना ठोस योगदान देना होगा।
इस प्रस्ताव ने मित्र देशों और विरोधियों दोनों के बीच खलबली मचा दी है। आलोचकों का तर्क है कि शांति और सुरक्षा को बिक्री की वस्तु बनाना खतरनाक साबित हो सकता है। यूरोपीय और एशियाई सहयोगियों के बीच यह डर है कि इससे केवल अमीर देशों का ही दबदबा कायम होगा, जबकि विकासशील और गरीब देश वैश्विक शांति प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।
राजनयिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मांग नाटो देशों से उनके रक्षा बजट बढ़ाने की पुरानी मांग का एक अधिक कठोर संस्करण है। ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि यह अमेरिकी करदाताओं के पैसे बचाने और अन्य देशों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराने का एक साहसी तरीका है। दूसरी ओर, विरोधियों का मानना है कि इससे अमेरिका की सॉफ्ट पावर कम होगी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका नैतिक नेतृत्व कमजोर होगा।
यदि यह योजना लागू होती है, तो यह संयुक्त राष्ट्र जैसे संस्थानों की प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दुनिया के अन्य शक्तिशाली देश इस भुगतान करो और हिस्सा लो मॉडल को स्वीकार करेंगे या अपनी अलग शांति व्यवस्थाएं बनाएंगे। ट्रंप की यह नीति स्पष्ट संदेश देती है कि उनके दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी विदेश नीति का केंद्र बिंदु आर्थिक लाभ ही रहने वाला है।