प्रवासी पक्षियों को पसंद आ गया है यहां का वातावरण
राष्ट्रीय खबर
भुवनेश्वरः एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील, ओडिशा की चिल्का झील ने इस साल एक नया रिकॉर्ड बनाया है। शीतकालीन प्रवास के दौरान यहाँ आने वाले पक्षियों की संख्या 11 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। वन्यजीव विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष भारत और विदेशों से कुल 196 प्रजातियों के पक्षी यहाँ पहुँचे हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है।
इस साल पक्षियों की कुल संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 4,972 की वृद्धि देखी गई है। सबसे सुखद बात यह है कि इन 11 लाख पक्षियों में से 11,10,257 पक्षी 106 विदेशी प्रजातियों के हैं। पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक और विशेष आकर्षण दो नई प्रजातियों प्लेन मार्टिन और बंगाल बुश लार्क का पहली बार यहाँ दिखाई देना रहा। प्रजातियों के लिहाज से, नादर्न पिनटेल सबसे अधिक संख्या (2,18,993) में यहाँ पहुँचे हैं।
पक्षी गणना का यह विशाल कार्य चिल्का वन्यजीव विभाग के तहत 5 वन श्रेणियों में 22 विशेषज्ञ टीमों द्वारा किया गया। इस प्रक्रिया में पक्षी विशेषज्ञों, ओडिशा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों और 130 चिल्का विकास प्राधिकरण के कर्मियों ने हिस्सा लिया। सर्वेक्षण के लिए 19 टीमों ने जल क्षेत्रों और 3 टीमों ने स्थलीय क्षेत्रों की बारीकी से जांच की।
वन्यजीव विभाग के अनुसार, चिल्का झील में पक्षियों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध भोजन और सुरक्षित वातावरण है। यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र प्रवासी पक्षियों के प्रजनन और शीतकालीन प्रवास के लिए दुनिया के सबसे पसंदीदा स्थलों में से एक बन गया है। सरकार द्वारा अवैध शिकार पर कड़ाई और स्थानीय समुदायों की भागीदारी ने भी चिल्का को इन आसमानी मेहमानों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल बना दिया है।