देश भर में आलोचना और हंगामा होने के बाद कार्रवाई
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत के विमानन सुरक्षा नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर 22.2 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई दिसंबर 2025 में हुई उड़ानों की व्यापक अव्यवस्था और नियमों के उल्लंघन की जांच के बाद की गई है। दिसंबर के शुरुआती सप्ताह में इंडिगो की परिचालन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। डीजीसीए की चार सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि एयरलाइन ने अपने संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया था।
जांच में पाया गया कि पायलटों और केबिन क्रू को उनकी क्षमता से अधिक काम करने के लिए मजबूर किया गया। नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों का पालन करने के बजाय, एयरलाइन ने रोस्टर बफर मार्जिन को न्यूनतम कर दिया था। एयरलाइन का पूरा ध्यान विमानों और कर्मचारियों के अधिकतम उपयोग पर था, जिससे किसी भी आपात स्थिति या व्यवधान से निपटने के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची थी। संकट के दौरान एयरलाइन के पास अनिवार्य विश्राम नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक संख्या से 65 कम कप्तान मौजूद थे।
आंकड़ों के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच इंडिगो ने 2,507 उड़ानें रद्द कीं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई। इस अव्यवस्था के कारण लगभग 3 लाख से अधिक यात्री विभिन्न हवाई अड्डों पर फंसे रहे, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा हुआ था।
कुल ₹22.2 करोड़ के जुर्माने का विवरण इस प्रकार है। विमानन नियमों के छह अलग-अलग उल्लंघनों के लिए एकमुश्त जुर्माना। संशोधित ड्यूटी नियमों के निरंतर उल्लंघन के लिए 68 दिनों तक 30 लाख रुपये प्रतिदिन की दर से संचयी जुर्माना। इसके अलावा, डीजीसीए ने एयरलाइन के सीईओ पीटर एल्बर्स और मुख्य परिचालन अधिकारी को कारण बताओ नोटिस और चेतावनी जारी की है। साथ ही, ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष को उनके पद से हटाने का आदेश दिया है। भविष्य में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए इंडिगो को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का भी निर्देश दिया गया है।