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आठ साल के बाद बीजिंग में नया समीकरण

अमेरिकी राष्ट्रपति की हरकतों से तंग आ गया कनाडा

  • मार्क कार्नी ने जिनपिंग से भेंट की

  • आठ साल पहले हुआ था तनाव

  • कई मुद्दों पर एक साथ चर्चा हुई

बीजिंगः कनाडा और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक तनाव के बीच एक बड़ी खबर बीजिंग से आ रही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर और कनाडा की राजनीति में उभरते हुए प्रमुख व्यक्तित्व मार्क कार्नी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है। इस बैठक को आठ साल से जारी ठंडे संबंधों (फ्रीज) के बाद एक टर्निंग पॉइंट या महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। दरअसल हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानो से कई  मित्र देश नाराज हुए हैं, इसलिए वे भी वैश्विक कूटनीति में अमेरिका के बदले चीन से अपने  संबंध सुधार रहे हैं।

2018 में हुआवेई की कार्यकारी मेंग वानझोउ की गिरफ्तारी और उसके जवाब में चीन द्वारा दो कनाडाई नागरिकों को हिरासत में लेने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में भारी गिरावट आई थी। मार्क कार्नी, जिन्हें कनाडा के भविष्य के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी देखा जा रहा है, की यह यात्रा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक कनाडाई सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह चीन के साथ व्यापारिक और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर फिर से जुड़ना चाहती है। वार्ता के दौरान, शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि कार्नी ने वैश्विक वित्तीय स्थिरता और स्थायी विकास के महत्व को रेखांकित किया।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी देश चीन के साथ अपने आर्थिक संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि कनाडा के भीतर इस मुलाकात की आलोचना भी हो रही है, विशेष रूप से विपक्षी दलों द्वारा जो चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर सख्त रुख की मांग कर रहे हैं।

फिर भी, बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई यह उच्च-स्तरीय चर्चा इस बात का संकेत है कि ओटावा और बीजिंग के बीच कूटनीतिक बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह केवल एक औपचारिक मुलाकात थी या इससे कनाडा की विदेश नीति में कोई बड़ा बदलाव आएगा।