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मैच के दौरान कबूतर और बंदर अंदर आये

राष्ट्रीय बैडमिंटन प्रतियोगिता के आयोजन स्थल पर सवाल

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली के के.डी. जाधव इंडोर हॉल में आयोजित हो रहे इंडिया ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट में शुक्रवार की सुबह एक ऐसी घटना घटी जिसने खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह घटना खेल के प्रदर्शन के कारण नहीं, बल्कि स्टेडियम के भीतर फैली अव्यवस्थाओं और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण चर्चा में है।

शुक्रवार सुबह जब क्वार्टर फाइनल के महत्वपूर्ण मुकाबले शुरू होने वाले थे, तभी कोर्ट पर कबूतरों और बंदरों के घुस आने के कारण मैचों को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेडियम की छतों से कबूतरों की बीट सीधे बैडमिंटन कोर्ट पर गिर रही थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए यह न केवल खेल में बाधा थी, बल्कि कोर्ट के फिसलन भरा होने के कारण उनकी सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गई।

इसके अतिरिक्त, स्टेडियम के दर्शक दीर्घा और कॉरिडोर में बंदरों की मौजूदगी ने वहां मौजूद अधिकारियों और प्रशंसकों के बीच हड़कंप मचा दिया। यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली के इस ऐतिहासिक स्टेडियम में वन्यजीवों के कारण खेल बाधित हुआ हो, लेकिन एक ‘सुपर 750’ श्रेणी के टूर्नामेंट में ऐसी घटना का होना वैश्विक स्तर पर भारत की खेल प्रबंधन छवि पर सवाल उठाता है।

मैदान पर मौजूद विदेशी खिलाड़ियों ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई है। बैडमिंटन जैसे खेल में, जहाँ शटलकॉक की गति 400 किमी प्रति घंटा से अधिक हो सकती है, खिलाड़ी का पूरा ध्यान कोर्ट की ग्रिप और मूवमेंट पर होता है। कोर्ट पर पक्षियों की बीट होने से पैर फिसलने और गंभीर चोट लगने का डर बना रहता है। कई कोचों ने इसे अव्यवसायिक करार दिया है और विश्व बैडमिंटन महासंघ से इसकी औपचारिक शिकायत करने की बात कही है।

स्थानीय आयोजकों और खेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों के लिए यह स्थिति शर्मिंदगी का विषय बन गई है। टूर्नामेंट के लिए करोड़ों का बजट आवंटित होने के बावजूद, स्टेडियम को पक्षियों और जानवरों से मुक्त रखने जैसे बुनियादी इंतजामों की कमी दिखी।

हालांकि, कर्मचारियों ने आनन-फानन में कोर्ट की सफाई की, लेकिन मैच के बीच में इस तरह के अंतराल ने खिलाड़ियों की लय को बुरी तरह प्रभावित किया। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि भारत को बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी के दौरान न केवल खेल सुविधाओं, बल्कि स्टेडियम के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर भी गहन काम करने की आवश्यकता है।