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त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य गिरफ्तार

सबरीमाला सोना चोरी मामले में एसआईटी की जांच जारी

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हुए स्वर्ण चोरी कांड ने न केवल धार्मिक जगत को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि इसने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब तिरुवनंतपुरम में पुलिस की विशेष जांच टीम ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य के.पी. शंकरदास को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि शंकरदास वर्तमान में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या (मस्तिष्क आघात या स्ट्रोक) के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, इसीलिए पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी अस्पताल में ही दर्ज की। उन्हें इस बहुचर्चित मामले में 11वें आरोपी के रूप में नामजद किया गया है।

शंकरदास की यह गिरफ्तारी कानून और व्यवस्था के प्रति बढ़ते दबाव का परिणाम मानी जा रही है। गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले, केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुस्त जांच को लेकर विशेष जांच टीम को कड़ी फटकार लगाई थी।

अदालत ने बेहद सख्त लहजे में सवाल पूछा था कि क्या शंकरदास की गिरफ्तारी में जानबूझकर देरी की जा रही है क्योंकि उनका बेटा एक सेवारत आईपीएस अधिकारी है? कोर्ट की इस टिप्पणी ने जांच अधिकारियों को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 12 तक पहुंच गई है, जिनमें मंदिर प्रशासन और पुजारियों से जुड़े लोग शामिल हैं।

एसआईटी की जांच की सुई अब साल 2017 में मंदिर के सोने की परत चढ़े ध्वज स्तंभ के जीर्णोद्धार कार्य की ओर मुड़ गई है। जांच तब और सघन हो गई जब हाल ही में गिरफ्तार किए गए सबरीमाला तांत्री कंडारारू राजीवरू के घर से पुराने ध्वज स्तंभ का वाजी वाहन (देवता का वाहन मानी जाने वाली घोड़े की मूर्ति) बरामद किया गया।

यद्यपि राजीवरू ने अपना बचाव करते हुए दलील दी है कि मंदिर की परंपरा के अनुसार, जब ध्वज स्तंभ का नवीनीकरण होता है, तो पुराना वाजी वाहन मुख्य पुजारियों को सौंप दिया जाता है। हालांकि, जांच टीम इस दावे की सत्यता और इसके पीछे के कानूनी आधारों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक विवाद को भी जन्म दे दिया है। 2017 में जब ध्वज स्तंभ का कार्य हुआ था, उस समय बोर्ड में शामिल कांग्रेस नेताओं की भूमिका भी अब जांच के दायरे में है। श्रद्धालुओं के बीच इस घोटाले को लेकर भारी आक्रोश है, क्योंकि मंदिर के पवित्र आभूषणों और निर्माण सामग्री में हेराफेरी करना उनकी आस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस मूर्ति की आड़ में मंदिर की अन्य बेशकीमती स्वर्ण वस्तुओं को भी ठिकाने लगाया गया था। आने वाले दिनों में कुछ और प्रभावशाली नामों के खुलासे की संभावना ने केरल के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।