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आरबीआई से देश में सहायक कंपनी बनाने की मंजूरी

पहले से महानगरों में सक्रिय थी जापान की बैंकिंग कंपनी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक ने 14 जनवरी को भारत के वित्तीय परिदृश्य को और अधिक वैश्विक और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक ने जापान की दिग्गज बैंकिंग संस्था, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन को भारत में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह महत्वपूर्ण अनुमति भारतीय रिजर्व बैंक (विदेशी बैंकों द्वारा पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों की स्थापना) दिशानिर्देश, 2025 के कड़े प्रावधानों के तहत दी गई है। यह फैसला न केवल भारत में विदेशी बैंकिंग संरचना में बदलाव लाएगा, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

वर्तमान परिचालन की बात करें तो एसएमबीसी अब तक भारत में शाखा मोड के तहत काम कर रहा था। वर्तमान में इसकी चार मुख्य शाखाएं देश के रणनीतिक व्यापारिक केंद्रों—नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में स्थित हैं। आरबीआई की इस नई अनुमति के बाद, यह जापानी बैंक अपनी इन मौजूदा शाखाओं को एक एकल भारतीय कानूनी इकाई यानी सहायक कंपनी के रूप में परिवर्तित करने में सक्षम होगा।

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रांच मोड की तुलना में सहायक कंपनी मॉडल विदेशी बैंकों के लिए अधिक फायदेमंद होता है। यह मॉडल बैंक को स्थानीय बाजार में अधिक गहराई तक पैठ बनाने, खुदरा बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने और भारतीय बैंकिंग नियमों के दायरे में रहते हुए अधिक स्वायत्तता के साथ काम करने की सुविधा प्रदान करता है।

यह विकास भारत और जापान के बीच निरंतर मजबूत होते द्विपक्षीय आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों का एक जीवंत उदाहरण है। एसएमबीसी जैसे वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बैंक के पूर्ण विस्तार से भारतीय कॉर्पोरेट जगत, विशेष रूप से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भारी लाभ होने की उम्मीद है।

भारत में सक्रिय जापानी कंपनियों और बड़े औद्योगिक घरानों को अब अधिक सुव्यवस्थित और व्यापक वित्तीय सेवाएं मिल सकेंगी। इसके अतिरिक्त, सहायक कंपनी के रूप में परिवर्तित होने से बैंक को अपनी पूंजी संरचना को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

आरबीआई के इस कदम का दूरगामी प्रभाव भारतीय बैंकिंग इकोसिस्टम पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से अन्य अंतरराष्ट्रीय बैंकों को भी प्रोत्साहन मिलेगा कि वे अपनी भारतीय शाखाओं को पूर्ण सहायक कंपनियों में तब्दील करें। इससे भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा तेज होगी और उपभोक्ताओं को अधिक उन्नत डिजिटल बैंकिंग सेवाएं प्राप्त होंगी। अंततः, यह पहल भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और वित्तीय समावेशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगी।