भोपाल : इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद भोपाल में पहली बार हुई ‘जल सुनवाई’ में जनता की पीड़ा और आक्रोश साफ नजर आया. राजधानी के सभी 85 वार्डों में आयोजित इस पहल में रहवासी दूषित पानी की शिकायतें लेकर पहुंचे. कई लोग पेट और त्वचा रोग के इलाज के डॉक्टरों के पर्चे साथ लाए थे. लोगों का आरोप था कि नगर निगम टैक्स वसूली में व्यस्त है, लेकिन स्वच्छ पानी देने में विफल साबित हो रहा है.
जल सुनवाई में उमड़ा गुस्सा, 49 सैंपल लिए गए
मंगलवार को सुबह 11 बजे शुरू हुई पहली जल सुनवाई दोपहर 1 बजे तक चली. इस दौरान अलग-अलग वार्डों से आए रहवासियों ने दूषित पानी की शिकायतें दर्ज कराईं. शहर के विभिन्न स्थानों के कुल 49 पानी के नमूने लिए गए. वहीं वार्ड-44 में गंदा पानी मिलने की पुष्टि होते ही तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई. नगर निगम अधिकारियों का कहना है की शहर में किसी भी जगह जल गुणवत्ता में कमी मिलने पर तुरंत कदम उठाए जा रहे हैं.
बीमारी का सबूत बने डॉक्टर के पर्चे
जल सुनवाई में पहुंचे कई रहवासियों ने बताया कि दूषित पानी पीने से पेट दर्द, दस्त, एलर्जी और त्वचा रोग तेजी से बढ़ रहे हैं. लोगों ने डॉक्टरों के लिखे इलाज के पर्चे दिखाकर कहा कि यह बीमारियां खराब पानी की वजह से हैं. महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल हुए, जिनके हाथों में पोस्टर थे. प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप था कि निगम उन्हें जहरीला पानी पीने को मजबूर कर रहा है.
आईएसबीटी में प्रदर्शन, अधिकारी नहीं पहुंचे बाहर
निशातपुरा के ब्रिज विहार सहित कई इलाकों के रहवासी दूषित पानी की शिकायत लेकर आईएसबीटी स्थित नगर निगम कार्यालय पहुंचे. यहां नगर निगम कार्यालय के बाहर एक तरफ लोग प्रदर्शन कर रहे थे, जबकि अंदर परिषद की बैठक चल रही थी. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इसके वाबजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि उनसे मिलने बाहर नहीं आया. इससे नाराज लोगों ने नारेबाजी की और वहीं धरने पर बैठ गए. हालांकि, पुलिस प्रदर्शनकारियों को समझाइश देती रही, लेकिन लोग समाधान की मांग पर अड़े रहे.
इन मानकों पर होगी पानी की जांच
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि जल सुनवाई के दौरान लिए गए नमूनों की जांच रंग, स्वाद, गंध, पीएच, टीडीएस, टरबिडिटी, क्लोराइड, कठोरता, रेसिडुअल क्लोरीन, कोलीफार्म और ई-कोलाई जैसे मानकों पर की जाएगी. आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर, खानूगांव और हरिपुरा जैसे इलाकों में पानी की गुणवत्ता खराब मिलने पर पहले ही भूजल उपयोग पर रोक लगाई जा चुकी है. निगम का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे सख्त कार्रवाई होगी.