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वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई पर सिंगापुर की राय

इससे छोटे देशों के लिए नया खतरा उभराःली ह्सियन लंग

सिंगापुरः दक्षिण-पूर्वी एशिया के प्रमुख व्यापारिक और वित्तीय केंद्र सिंगापुर ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक दबाव वाली नीति पर अपनी गहरी चिंता साझा की है। यद्यपि सिंगापुर और वेनेजुएला के बीच भौगोलिक दूरी लगभग 20,000 किलोमीटर है, लेकिन सिंगापुर इसे महज एक क्षेत्रीय संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के भविष्य के लिए एक खतरे के रूप में देख रहा है।

जंगल राज का भय और अंतरराष्ट्रीय कानून सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ राजनेता ली ह्सियन लूंग ने हाल ही में एक फोरम में जोर देकर कहा कि यदि दुनिया में ताकतवर देश अपनी मर्जी से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और संप्रभुता का उल्लंघन करने लगेंगे, तो छोटे देशों के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा।

उन्होंने तर्क दिया कि वैश्विक व्यवस्था जंगल राज (Law of the Jungle) में बदल जाएगी, जहाँ केवल शक्तिशाली की बात सुनी जाएगी। सिंगापुर का इतिहास गवाह है कि वह सिद्धांतों पर अडिग रहा है—चाहे वह 1983 में ग्रेनाडा में अमेरिकी हस्तक्षेप हो या वर्तमान में यूक्रेन पर रूस का आक्रमण; सिंगापुर ने हमेशा संप्रभुता के उल्लंघन का विरोध किया है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जिस वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय नियमों की रूपरेखा अमेरिका ने तैयार की थी, उसी के संरक्षण में सिंगापुर जैसे छोटे देशों ने अद्वितीय आर्थिक विकास किया। ली ह्सियन लूंग का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति उसी आधारशिला को कमजोर कर रही है। जब एक महाशक्ति स्वयं अपने बनाए नियमों को दरकिनार करती है, तो छोटे देशों के लिए सुरक्षा और स्थिरता का संकट पैदा हो जाता है।

भविष्य के नेताओं के लिए तीन स्तंभ ली ने उभरते हुए राजनेताओं को इस अस्थिर दुनिया में जीवित रहने और फलने-फूलने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था ही किसी देश की सबसे बड़ी ढाल है। उन्होंने बताया कि सिंगापुर अपनी जीडीपी का लगभग 3 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करता है ताकि एक विश्वसनीय निवारक क्षमता बनी रहे। अपने पड़ोसियों के साथ मधुर संबंध रखना और दुनिया के अन्य आर्थिक केंद्रों के साथ साझेदारी करना अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सिद्धांत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन व्यापार और समृद्धि को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि रूस पर कड़े बयान और कुछ प्रतिबंध लगाने के बावजूद सिंगापुर ने उसके साथ व्यापारिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं किए। यह संतुलित दृष्टिकोण दर्शाता है कि ट्रंप युग की अनिश्चितताओं के बीच सिंगापुर अपनी सुरक्षा और समृद्धि के लिए यथार्थवादी कूटनीति का सहारा ले रहा है।