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बैंक अधिकारियों की मिलीभगत सामने आयी

डिजिटल अरेस्ट के जाल में 96 लाख की ठगी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक सनसनीखेज साइबर अपराध का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक 80 वर्षीय बुजुर्ग को सात दिनों तक मानसिक और डिजिटल कैद में रखकर करीब 96 लाख रुपये हड़प लिए गए। इस मामले ने इसलिए अधिक चौंकाया है क्योंकि इसमें प्रतिष्ठित यस बैंक के दो अधिकारी भी शामिल पाए गए हैं। आरोप है कि इन बैंक अधिकारियों ने ठगी के पैसे को सफेद करने के लिए फर्जी दस्तावेजों पर करंट अकाउंट खोले थे। इस पूरे गिरोह के पांच सदस्यों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।

ठगी का शिकार हुए बुजुर्ग ने बताया कि उन्हें ट्राई और सीबीआई के नाम पर डराया गया था। ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें विश्वास दिलाया कि उनका आधार कार्ड ड्रग तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। पीड़ित पर दबाव बनाने के लिए ठगों ने एक फर्जी डिजिटल कोर्ट और वकील तक का दृश्य रचा था। बुजुर्ग को सात दिनों तक कमरे से बाहर नहीं निकलने दिया गया और चौबीसों घंटे कैमरे की निगरानी में रखा गया। इस डर के साये में उन्होंने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, एफडी और यहां तक कि गोल्ड लोन लेकर ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।

पुलिस जांच में हरियाणा के हिसार और ओडिशा के भुवनेश्वर से अपराधियों के तार जुड़े मिले। पकड़े गए बैंक अधिकारियों—नीलेश कुमार और चंदन कुमार, ने ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए बैंकिंग प्रणाली की खामियों का लाभ उठाया। दिल्ली पुलिस ने इस घटना को एक संगठित अंतरराज्यीय अपराध माना है। अधिकारियों ने जनता को सचेत किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। यदि कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए।