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कंबोडिया से चीन प्रत्यर्पित किया गया अरबपति टाइकून

कथित साइबर अपराध सरगना गिरफ्तार

बीजिंगः एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क में से एक को चलाने के आरोपी और अमेरिकी संघीय अभियोजकों द्वारा वांछित एक प्रमुख उद्योगपति को गिरफ्तार कर चीन प्रत्यर्पित कर दिया गया है। कंबोडियाई अधिकारियों और चीनी सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि 38 वर्षीय चेन झी, जो चीन और कंबोडिया की दोहरी नागरिकता रखता था, को दोनों देशों के महीनों लंबे साझा अभियान के बाद मंगलवार को बीजिंग के हवाले कर दिया गया। कंबोडियाई आंतरिक मंत्रालय ने एक बयान में स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण से पहले चेन की कंबोडियाई नागरिकता रद्द कर दी गई थी।

चेन झी प्रिंस ग्रुप का संस्थापक और अध्यक्ष है, जो कंबोडिया के सबसे बड़े व्यापारिक समूहों में से एक माना जाता है। यह समूह लक्जरी रियल एस्टेट, बैंकिंग सेवाओं, होटल और बड़े निर्माण कार्यों में निवेश के लिए जाना जाता है। हालांकि, अमेरिकी संघीय अभियोजकों का आरोप है कि उसका यह व्यापारिक साम्राज्य बंधुआ मज़दूरी और क्रिप्टोकरेंसी घोटालों की नींव पर टिका था। जांच के अनुसार, इन घोटालों के माध्यम से दुनिया भर के लोगों को ठगा गया और एक समय पर चेन और उसके सहयोगी कथित तौर पर प्रतिदिन 30 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) की कमाई कर रहे थे।

पिछले अक्टूबर में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने प्रिंस ग्रुप और उससे जुड़ी दर्जनों कंपनियों पर प्रतिबंध लगाते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन घोषित किया था। न्यूयॉर्क में चेन पर उनकी अनुपस्थिति में मनी लॉन्ड्रिंग और वायर फ्रॉड की साजिश रचने के आरोप तय किए गए थे।

अमेरिकी न्याय विभाग ने चेन से 15 बिलियन डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी भी जब्त की है, जिसे विभाग के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी ज़ब्ती कार्रवाई बताया गया है। इस कार्रवाई के बाद सिंगापुर, थाईलैंड और हांगकांग जैसे क्षेत्रों में भी उसकी करोड़ों डॉलर की संपत्ति फ्रीज कर दी गई है।

चीनी सरकारी मीडिया द्वारा जारी फुटेज में चेन झी को हथकड़ी लगे और सिर ढके हुए चीनी सुरक्षा बलों की निगरानी में विमान से उतरते हुए दिखाया गया है। हालांकि प्रिंस ग्रुप ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयानों में इन सभी आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन चीन में उन पर चलने वाला मुकदमा इस नेटवर्क की कई और परतों को खोल सकता है। यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों के खिलाफ वैश्विक सहयोग में एक बड़ी जीत मानी जा रही है।