पलामूः वह इलाका जो कभी देश भर में नक्सल कमांडरों के लिए चर्चित रहा है. यह इलाका दक्षिण भारत एवं उत्तर भारत के माओवादियों को आपस में जोड़ता था. अब उस इलाके में माओवादियों की स्थिति बेहद ही कमजोर हो गई है मात्र एक मात्र व्यक्ति ही माओवादियों का कमांडर है.
दरअसल, झारखंड सरकार ने 56 इनामी नक्सली कमांडरों की सूची जारी की है. इस सूची में पलामू के रहने वाले मात्र दो इनामी नक्सल कमांडर शामिल हैं. माओवादियों का जोनल कमांडर संजय यादव उर्फ संजय गोदराम एवं टीएसपीसी का जोनल कमांडर शशिकांत गंझू. दोनों पर झारखंड की सरकार ने 10-10 लख रुपए का इनाम घोषित किया है.
संजय यादव उर्फ संजय गोदराम पलामू के छतरपुर थाना क्षेत्र के देवगन जबकि शशिकांत गंझू पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल का रहने वाला है. पलामू के रहने वाले किसी अन्य नक्सल पर किसी भी प्रकार की इनाम की राशि घोषित नहीं हुई है. संजय गोदराम पर झारखंड बिहार में 50 से भी अधिक नक्सली हमले को अंजाम देने का आरोप है जिसमें 10 से अधिक जवान शहीद हुए है. शशिकांत गंजू पर भी झारखंड में 35 से भी अधिक नक्सल हमले को अंजाम देने का आरोप है.
पुलिस लगातार बचे हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील कर रही है. उनके खिलाफ अभियान भी चलाया जा रहा है. नक्सलियों के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में बड़ी कार्रवाई हुई है. बड़ी संख्या में नक्सली पकड़े गए है, मारे गए है और सरेंडर भी हुए है. पुलिस सुरक्षाबलों के मेहनत का नतीजा है कि पलामू के इलाके में बेहद ही कम कमांडर बचे है, पुलिस लगातार उनसे आत्मसमर्पण की अपील भी कर रही है और अभियान भी चल रही है. -रीष्मा रमेशन, एसपी, पलामू.
पलामू के इलाके में मौजूद थे कभी 53 इनामी नक्सली
पलामू का इलाका पूरे देश भर में नक्सल गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है. नक्सल हिंसा में पहले हत्या पलामू के इलाके में ही हुई थी जबकि नरसंहार भी इसी इलाके में हुआ था. 2017-18 में पलामू के इलाके में 53 इनामी नक्सली कमांडर हुआ करते थे. अब इनकी संख्या घटकर मात्र दो रह गई. पुलिस कभी इनामी नक्सलियों की पोस्टर तैयार कर गांव-गांव बढ़ती थी और कई जगह बैनर भी लगाती थी. 2017-18 के बाद पलामू में नक्सलियों के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई हुई है जिसमें अब तक एक दर्जन के करीब नक्सली टॉप कमांडर मारे गए. जबकि 150 से अधिक गिरफ्तार हुए है.
नक्सलियों को नहीं मिल रहा नया कैडर और कमांडर
पलामू के इलाके में पुलिस एवं सुरक्षाबलों के अभियान के बाद कोई भी नया व्यक्ति नक्सल संगठन में शामिल नहीं हो रहा है. दस्ते में शामिल कैडर और कमांडर एक दशक से भी पुराने हैं. 2021 में माओवादियों के रास्ते में तुलसी भुईयां नामक कमांडर शामिल हुआ था, जो सुरक्षबलों के साथ हुए मुठभेड़ में 2025 में मारा गया था. पलामू के इलाके से टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे नक्सल संगठन लगभग खत्म हो गए हैं.