रांचीवासियों को मिलेगी हाईटेक टॉयलेट की सुविधा, पांच का सिक्का डालने पर खुलेगा दरवाजा, खासियत हैं बेशुमार
रांचीः रांची नगर निगम क्षेत्र के सभी चौक चौराहों पर मॉड्यूलर टॉयलेट देखने को मिल जाएंगे. लेकिन इस्तेमाल करने से लोग झिझकते हैं. वजह है, गंदगी, बदबू और पानी का अभाव. ज्यादातर मॉड्यूलर टॉयलेट में ताले लटके नजर आते हैं. आजतक यह जरूरी व्यवस्था सुचारू नहीं हो पाई है. इस दिशा में एक नई पहल से उम्मीद की किरण जगी है.
रांची में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहरवासियों को ओटीटी आधारित स्मार्ट टॉयलेट की सुविधा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है. पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट सिटी में इसकी शुरुआत हो गई है, जो खासियतों की वजह से चर्चा के केंद्र में है. यह टॉयलेट पूरी तरह ऑटोमेटिक सिस्टम से चलेगा और 5 रुपये का सिक्का डालने पर ही दरवाजा खुलेगा.
कैसे काम करेगा स्मार्ट टॉयलेट
उपयोगकर्ता को पहले बाहर लगे स्लॉट में सिर्फ 5 रुपये का सिक्का डालना होगा, इसके बाद दरवाजा अपने आप अनलॉक हो जाएगा. अंदर प्रवेश करते ही सेंसर और हाईटेक सिस्टम के जरिए लाइट, वॉश बेसिन, फ्लश और एग्जॉस्ट फैन ऑटोमेटिक तरीके से संचालित होंगे. नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि यह सिस्टम ओटीटी पर आधारित है. प्रायोगिक तौर पर इसकी शुरुआत की गई है. इसमें पानी की खपत बहुत कम होती है. अगर यह सिस्टम कारगर साबित होता है तो सभी पर्यटन स्थलों और सार्वजनिक जगहों पर इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.
सुरक्षा और मॉनिटरिंग सिस्टम
टॉयलेट के अंदर किसी तरह की छेड़छाड़ या तोड़फोड़ की कोशिश होते ही लॉकिंग सिस्टम एक्टिव होकर दरवाजा अपने आप बंद हो जाएगा. सीसीटीवी और रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिये नगर निगम कंट्रोल रूम से इन स्मार्ट टॉयलेट्स पर लगातार नजर रख सकेगा, जिससे चोरी और वंडलिज्म की घटनाओं पर रोक लगेगी.
सुविधा और स्वच्छता की खासियत
हर उपयोग के बाद ऑटो फ्लश और ऑटो क्लीनिंग सिस्टम सक्रिय होकर टॉयलेट को स्वतः साफ करेगा, जिससे बदबू और गंदगी की समस्या नहीं रहेगी. हैंड वॉश, साबुन डिस्पेंसर और ड्रायर जैसी सुविधाएं भी ऑटो सेंसर पर चलेंगी, जिससे बिना किसी नल या स्विच को छुए स्वच्छता बनी रहेगी.
रांची में विस्तार की योजना
नगर निगम ने शहर के व्यस्त चौक-चौराहों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे कई स्मार्ट टॉयलेट लगाने की योजना तैयार की है. पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद चरणबद्ध तरीके से नए वॉशरूम स्थापित किए जाएंगे, ताकि राजधानी में सार्वजनिक शौचालयों की कमी दूर हो सके और स्वच्छता अभियान को गति मिल सके.