अपनी पुरानी राय पर अब भी कायम है आंध्र के पूर्व सीएम
राष्ट्रीय खबर
हैदराबादः आंध्र प्रदेश की राजनीति में राजधानी के मुद्दे को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने राज्य की राजधानी के रूप में अमरावती के निर्माण पर अपना कड़ा विरोध दोहराया है। गुरुवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने इस पूरी परियोजना को पागलपन भरा कदम करार देते हुए इसके भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए। जगन का मुख्य तर्क यह है कि अमरावती का भौगोलिक स्थान किसी भी बड़े प्रशासनिक केंद्र या राजधानी शहर के निर्माण के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय रूप से पूरी तरह अनुपयुक्त है।
जगन मोहन रेड्डी ने वैज्ञानिक और भौगोलिक कारणों का हवाला देते हुए कहा कि अमरावती का अधिकांश हिस्सा कृष्णा नदी के बेसिन (नदी घाटी क्षेत्र) में आता है। उन्होंने चेतावनी दी कि नदी के बहाव क्षेत्र या उसके बेहद करीब भारी निर्माण कार्य करना प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उनके अनुसार, यह क्षेत्र बाढ़ के प्रति बेहद संवेदनशील है और यहाँ बड़ी इमारतें बनाना न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह भविष्य में गंभीर कानूनी और सुरक्षा संबंधी जटिलताओं को भी आमंत्रित करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट को भी इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि नदी बेसिन में निर्माण कार्य करना दीर्घकालिक रूप से विनाशकारी साबित हो सकता है।
आर्थिक मोर्चे पर प्रहार करते हुए जगन ने कहा कि अमरावती एक ऐसी उपेक्षित जमीन है जहाँ बिजली, सड़क, पानी और सीवरेज जैसे बुनियादी ढांचे का नामोनिशान तक नहीं है। उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) सरकार के पिछले विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि शुरुआती चरण में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ही 1 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता थी, जो अब बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। जगन ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी धनराशि खर्च करना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय रूप से आत्मघाती और अव्यवहारिक है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चंद्रबाबू नायडू पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि अमरावती का चयन केवल निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए किया गया था। उन्होंने दावा किया कि राजधानी घोषित करने से पहले ही नायडू और उनके करीबियों ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी थीं। जगन ने अपना पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि विजयवाड़ा और गुंटूर के बीच पहले से विकसित क्षेत्र को राजधानी बनाना बेहतर होता। उनका मानना है कि वर्तमान सरकार द्वारा अतिरिक्त 50,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव केवल रियल एस्टेट के हितों को साधने की कोशिश है, न कि जनहित का कार्य। यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अमरावती को एकमात्र राजधानी के रूप में वैधानिक दर्जा देने के लिए संसद में विधेयक लाने की तैयारी कर रही है।