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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की तैयारी

इसी माह के अंत तक होगा इस ट्रेन का शुभारंभ

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, उत्तर रेलवे की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन अपनी तैयारियों के अंतिम चरण में पहुंच गई है। उत्तर रेलवे को उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत मार्ग पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। यह पायलट प्रोजेक्ट न केवल भारतीय रेलवे के लिए बल्कि देश के परिवहन क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित होने वाला है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए हरियाणा के जींद में एक विशेष हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। हरियाणा सरकार ने पुष्टि की है कि इस प्लांट के लिए 11 केवी की निरंतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई है। इस प्लांट में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन भंडारण की क्षमता होगी, जो ट्रेन के परीक्षण (कमीशनिंग) और नियमित परिचालन के दौरान ईंधन की मुख्य आपूर्ति करेगा। वर्तमान में, यह प्लांट अपने अंतिम चालू होने की प्रक्रिया (कमीशनिंग फेज) में है। हाल ही में, हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधिकारियों के साथ इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा भी की है।

पिछले महीने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि इस ट्रेन का विकास अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन द्वारा निर्धारित विशिष्टताओं के आधार पर किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की हाइड्रोजन-आधारित ट्रेन तकनीक की क्षमता का प्रदर्शन करना है। रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हाइड्रोजन ट्रेन-सेट का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन के आवश्यक परीक्षण (ट्रायल्स) सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं, जो इसके सुरक्षित और कुशल संचालन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

हाइड्रोजन ट्रेनें पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में शून्य उत्सर्जन करती हैं, क्योंकि इनसे धुएं के बजाय केवल जलवाष्प निकलता है। यह परियोजना भारत के ‘नेट-जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगी। जींद-सोनीपत रूट पर इसकी सफलता के बाद, रेलवे की योजना अन्य पहाड़ी और हेरिटेज रूटों पर भी ऐसी ट्रेनें चलाने की है। भारत अब जर्मनी और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होने के करीब है, जिनके पास हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक उपलब्ध है।