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सांसद मौसम नूर की कांग्रेस में वापसी का एलान किया

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मालदा के समीकरण बदले

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े राज्य के राजनीतिक गलियारों में उस समय एक बड़ी हलचल मच गई, जब तृणमूल कांग्रेस की कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद मौसम नूर ने अपनी पुरानी पार्टी, कांग्रेस में घर वापसी कर ली। शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में 46 वर्षीय नूर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। यह घटनाक्रम बंगाल की राजनीति, विशेषकर मालदा क्षेत्र के समीकरणों को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है।

मौसम नूर का नाता बंगाल के सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवारों में से एक, दिवंगत ए.बी.ए. गनी खान चौधरी के परिवार से है। गनी खान चौधरी मालदा में कांग्रेस के पर्याय माने जाते थे और आज भी वहां उनका प्रभाव अमिट है। मौसम नूर खुद 2009 से 2019 तक कांग्रेस की ओर से दो बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं।

हालांकि, 2019 के आम चुनावों से पहले जब कांग्रेस और ममता बनर्जी की पार्टी के बीच गठबंधन की राह नहीं बन सकी, तो नूर ने नाराज होकर टीएमसी का दामन थाम लिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद ममता बनर्जी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेजकर उनका राजनीतिक कद बरकरार रखा था।

कांग्रेस में अपनी वापसी के कारणों को स्पष्ट करते हुए नूर ने भावुक लहजे में कहा कि यह उनके पूरे परिवार का सामूहिक निर्णय है। उन्होंने कहा, मालदा में गनी खान चौधरी की विरासत और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि हम सब मिलकर कांग्रेस के बैनर तले काम करें। उन्होंने संकल्प जताया कि वे आगामी विधानसभा चुनावों में बंगाल के कोने-कोने में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देंगी।

इस दलबदल ने इंडिया गठबंधन के भीतर की दरारों को भी उजागर कर दिया है। टीएमसी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हैरानी जताई कि गठबंधन का साझेदार होने के बावजूद कांग्रेस ने उनके मौजूदा सांसद को अपनी पार्टी में शामिल किया है। इसके जवाब में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि एक मजबूत कांग्रेस ही एक मजबूत गठबंधन की नींव बन सकती है। उन्होंने उन नेताओं पर भी तंज कसा जो गठबंधन की भावना के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। हालांकि, मालदा के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी की इस कार्यक्रम से अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े किए, लेकिन पार्टी ने सफाई दी कि वे पहले से निर्धारित कार्यक्रमों के कारण ओडिशा के दौरे पर थे।