Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
देश में चमकेगा जबलपुर का हरा सोना, मटर महोत्सव में जबलपुरी मटर को मिली नई उपाधि मरने से पहले भोपाल के कमलापति आर्च ब्रिज पर बनाई रील, सोशल मडिया पर पोस्ट शहडोल के ब्यौहारी इलाके में आतंक का पर्याय 007 गैंग, 5 बदमाश गिरफ्त में रेत माफिया ने किया वन अमले पर पथराव, दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, डंपर छुड़ा ले गए घर से निकलने से पढ़ लें खबर, बदल गया इंदौर मेट्रो का टाइम, जानें नया शेड्यूल योग शिक्षक ने बदला युवाओं के जीनव का नजरिया, 20 साल से सिखा रहे हैं योग इंदौर में 'AI वॉयस क्लोनिंग' का शिकार हुई टीचर: फोन पर सुनाई दी भाई की आवाज, एक क्लिक और पूरा बैंक ख... जम गया उत्तर भारत! गुरुग्राम में 0.6 तो माउंट आबू में -3 डिग्री पहुंचा पारा, बर्फीली हवाओं ने थामी ज... आमिर खान पर भारी पड़े 'डॉक्टर मशहूर गुलाटी'! सुनील ग्रोवर की मिमिक्री ने गार्ड्स को ऐसा उलझाया कि अस... मिडिल ईस्ट पर मंडराया महायुद्ध का खतरा: अमेरिका की 'जंग' में पिसेंगे ये 8 मुस्लिम देश, ईरान तनाव से ...

कोविड के टीके भी हृदय सूजन के कारण बने

स्टैनफोर्ड मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने अब जाकर खुलासा किया

  • दो प्रोटिनों की पहचान भी हुई है

  • गलत संकेतों का गलत असर होता

  • सोयाबीन का यौगिक मददगार होगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः शोधकर्ताओं ने उस जैविक प्रक्रिया का खुलासा किया है जो बताती है कि कैसे एमआरएनए आधारित कोविड 19 टीके, दुर्लभ मामलों में, किशोरों और युवा वयस्कों में हृदय की सूजन (मायोकार्डिटिस) का कारण बन सकते हैं। यह अध्ययन न केवल इस जोखिम के पीछे के कारणों को स्पष्ट करता है, बल्कि इसे कम करने की एक संभावित रणनीति भी सुझाता है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि टीकाकरण के बाद शरीर में दो-चरणीय प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होती है। इस प्रक्रिया में, टीका एक प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका को सक्रिय करता है, जो बदले में दूसरी कोशिका को उत्तेजित करती है। ये दोनों मिलकर ऐसी सूजन पैदा करते हैं जो हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुँचा सकती है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

स्टैनफोर्ड कार्डियोवैस्कुलर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. जोसेफ वू ने स्पष्ट किया कि यद्यपि इन टीकों ने महामारी को रोकने में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है, लेकिन कुछ लोगों में प्रतिक्रियाएं अलग हो सकती हैं। शोध के दौरान दो प्रोटीन सीएक्ससीएल 10 और आईएफएन गामा मुख्य संदिग्धों के रूप में उभरे। ये साइटोकिन्स (संकेत देने वाले अणु) हैं जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच संचार का काम करते हैं।

प्रयोगशाला में शोधकर्ताओं ने देखा कि मैक्रोफेज नामक कोशिकाएं टीकाकरण के बाद सीएक्ससीएल 10  छोड़ती हैं, जो T कोशिकाओं को अत्यधिक मात्रा में आईएफएन गामा बनाने के लिए प्रेरित करती हैं। जब इन दोनों प्रोटीनों का स्तर बढ़ जाता है, तो ये हृदय की रक्त वाहिकाओं में आसंजन अणुओं को सक्रिय कर देते हैं, जिससे प्रतिरक्षा कोशिकाएं हृदय के ऊतकों में घुसकर सूजन और क्षति पहुँचाने लगती हैं।

डॉ. वू के अनुसार, वैक्सीन से होने वाला मायोकार्डिटिस पारंपरिक हार्ट अटैक जैसा नहीं है क्योंकि इसमें रक्त वाहिकाओं में कोई रुकावट नहीं होती। अधिकांश मामले हल्के होते हैं और थोड़े समय में हृदय की कार्यप्रणाली सामान्य हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, यह जोखिम बहुत कम है—दूसरी खुराक के बाद 32,000 में से केवल एक व्यक्ति इससे प्रभावित होता है। इसके विपरीत, कोविड 19 संक्रमण से मायोकार्डिटिस होने का खतरा वैक्सीन की तुलना में 10 गुना अधिक है।

शोध दल ने पाया कि सोयाबीन में पाया जाने वाला एक यौगिक जेनिस्टीन इस सूजन को रोकने में प्रभावी हो सकता है। चूँकि मायोकार्डिटिस पुरुषों में अधिक देखा गया और एस्ट्रोजन में सूजन-रोधी गुण होते हैं, इसलिए शोधकर्ताओं ने जेनिस्टीन (जो एस्ट्रोजन जैसा व्यवहार करता है) का परीक्षण किया। चूहों और मानव हृदय कोशिका मॉडल पर किए गए परीक्षणों में जेनिस्टीन ने वैक्सीन से होने वाली हृदय क्षति को काफी हद तक कम कर दिया।

यह शोध भविष्य में एमआरएनए तकनीक को और अधिक सुरक्षित बनाने और अन्य अंगों पर इसके संभावित प्रभावों को समझने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

#कोविडवैक्सीन #स्टैनफोर्डशोध #हृदयस्वास्थ्य #मायोकार्डिटिस #चिकित्साविज्ञान #mRNAVaccine #StanfordMedicine #HeartHealth #MyocarditisResearch #MedicalBreakthrough