प्रियंका गांधी के वाहन के सामने आया बाघ
नये साल की छुट्टी मनाने एक साथ है गांधी परिवार
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सफारी में दूसरे पर्यटक भी मौजूद
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राहुल गांधी भी हैं परिवार के साथ
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झाड़ियों से अचानक निकला बाघ
राष्ट्रीय खबर
सवाई माधोपुर: राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान गुरुवार को उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा का सामना जंगल के राजा ‘बाघ’ से बेहद करीब से हुआ। प्रियंका गांधी अपने परिवार और भाई राहुल गांधी के साथ नए साल की छुट्टियों के अवसर पर यहां चार दिवसीय निजी यात्रा पर थीं। सफारी के दौरान हुआ यह रोमांचक वाकया न केवल गांधी परिवार के लिए बल्कि वहां मौजूद अन्य पर्यटकों के लिए भी कौतूहल और रोमांच का विषय बन गया।
देखें इसका वीडियो
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी अपने परिवार के साथ उद्यान के एक जोन में बाघों की अठखेलियां देखने के लिए सफारी वाहन (जिप्सी) से निकली थीं। सफारी के दौरान जब उनका वाहन एक कच्चे रास्ते से गुजर रहा था, तभी अचानक झाड़ियों में हलचल हुई और एक विशालकाय बाघ जंगल से निकलकर सीधे उनके वाहन के बिल्कुल सामने आ खड़ा हुआ। बाघ और प्रियंका गांधी के वाहन के बीच की दूरी महज कुछ फीट ही रह गई थी।
बाघ को इतनी करीब और अचानक सामने देखकर आसपास की अन्य जिप्सियों में सवार पर्यटक एक पल के लिए सहम गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जो पर्यटक बेहतर दृश्य के लिए अपनी सीटों पर खड़े होकर वीडियो बना रहे थे, वे बाघ की दहाड़ और उसकी मौजूदगी की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अपनी सीटों पर बैठ गए। हालांकि, बाघ ने किसी भी प्रकार की आक्रामकता नहीं दिखाई। वह कुछ देर तक रास्ते पर खड़ा रहा और फिर बेहद शांत भाव से शाही अंदाज में रास्ता पार कर दूसरी तरफ की घनी झाड़ियों में ओझल हो गया।
रणथंभौर वैसे तो अपने बाघों के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है, लेकिन किसी बाघ का इस तरह सफारी वाहन के ठीक सामने आकर रास्ता रोकना एक अत्यंत दुर्लभ और यादगार घटना मानी जाती है। वहां मौजूद अन्य पर्यटकों ने इस दुर्लभ पल को अपने कैमरों में कैद कर लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में प्रियंका गांधी बाघ को करीब से देखकर मुस्कुराती और इस जादुई पल का आनंद लेती नजर आ रही हैं।
गांधी परिवार 30 दिसंबर 2025 को रणथंभौर पहुंचा था और उन्होंने इस दौरान प्रकृति के संरक्षण और वन्यजीवों की महत्ता को करीब से समझा। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आमने-सामने के मुकाबले पर्यटकों को वन्यजीवों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं। यह घटना अब वन्यजीव प्रेमियों और राजनीतिक गलियारों में समान रूप से चर्चा का विषय बनी हुई है।