Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Dewas Firecracker Factory Blast: देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मौतों का आंकड़ा हुआ 6, आरोपियों पर... Delhi Infrastructure: पीएम गतिशक्ति से मजबूत हुई दिल्ली की कनेक्टिविटी, 'इग्जेम्प्लर' श्रेणी में राज... LU Paper Leak Scandal: 'तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया है', ऑडियो वायरल होने के बाद असिस्टेंट प्रोफे... Jaunpur News: सपा सांसद प्रिया सरोज की AI जेनरेटेड आपत्तिजनक फोटो वायरल, बीजेपी नेता समेत 2 पर FIR द... Kashmir Terror Hideout: बांदीपोरा में सुरक्षाबलों का बड़ा एक्शन, 'सर्च एंड डिस्ट्रॉय' ऑपरेशन में आतं... Delhi News: दिल्ली में सरकारी दफ्तरों का समय बदला, सीएम रेखा गुप्ता ने ईंधन बचाने के लिए लागू किए कड... Maharashtra IPS Transfer: महाराष्ट्र में 96 IPS अफसरों के तबादले, '12th Fail' वाले मनोज शर्मा बने मु... Aurangabad News: औरंगाबाद के सरकारी स्कूल में छात्रा से छेड़छाड़, टीसी देने के बहाने घर बुलाने का आर... Asansol Violence: आसनसोल में लाउडस्पीकर चेकिंग के दौरान बवाल, पुलिस चौकी पर पथराव और तोड़फोड़ Sabarimala Temple: सबरीमाला मंदिर के कपाट मासिक पूजा के लिए खुले, दर्शन के लिए वर्चुअल बुकिंग अनिवार...

औसतन हर दिन एक अपराधी को फांसी का भीषण रिकार्ड

सऊदी अरब में 356 लोगों को मृत्युदंड

रियाधः मध्य-पूर्व के प्रमुख देश सऊदी अरब ने नशीली दवाओं के प्रसार को रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में देश के इतिहास में अब तक के सर्वाधिक मृत्युदंड दिए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कुल 356 कैदियों की सजा-ए-मौत पर अमल किया गया। यह आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह सऊदी अरब में न्यायिक दंड की कठोरता को दर्शाता है।

विशेष रूप से, 2025 में कुल मृत्युदंडों में से 243 मामले केवल मादक पदार्थों की तस्करी और उनसे जुड़े अपराधों से संबंधित थे। यदि पिछले वर्ष यानी 2024 से तुलना की जाए, तो तब 338 लोगों को मृत्युदंड दिया गया था। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब सऊदी अरब ने मृत्युदंड के अपने ही पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। गौरतलब है कि सऊदी अरब ने लगभग तीन वर्षों तक नशीली दवाओं के मामलों में मृत्युदंड पर रोक लगा रखी थी, लेकिन 2022 के अंत में इस नीति को बदलते हुए पुनः कड़ी सजा देना शुरू कर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब फेनेथिलिन नामक एक अवैध उत्तेजक दवा का बहुत बड़ा बाजार बन गया है, जिसे स्थानीय स्तर पर कैप्टागन के नाम से जाना जाता है। इस नशीली दवा का व्यापार मध्य-पूर्व में अस्थिरता का एक बड़ा कारण रहा है। सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासनकाल के दौरान यह दवा देश के मुख्य निर्यात उत्पादों में से एक बन गई थी, जिससे प्राप्त धन का उपयोग विभिन्न सैन्य गतिविधियों में किया गया।

सऊदी अधिकारियों ने इस खतरे से निपटने के लिए राजमार्गों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा जांच को अत्यंत सख्त कर दिया है। इस व्यापक अभियान के दौरान करोड़ों की संख्या में नशीली गोलियां जब्त की गई हैं और अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोहों से जुड़े सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक जिन लोगों को मृत्युदंड दिया गया है, उनमें से अधिकांश विदेशी नागरिक हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएं लगातार सऊदी अरब की आलोचना कर रही हैं, उनका तर्क है कि नशीली दवाओं के अपराधों के लिए मृत्युदंड देना अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों का उल्लंघन है।