वीबी जी राम जी के नये विधेयक का विरोध हुआ
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को एक विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार के जी राम जी एक्ट के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। आम आदमी पार्टी सरकार ने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एक साजिश के तहत मनरेगा को खत्म करके गरीबों और दलित मजदूरों की आजीविका छीन रही है। प्रस्ताव में मांग की गई कि केंद्र सरकार मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करे, जो काम के अधिकार की गारंटी देता था।
सत्र के दौरान सदन में उस समय भारी हंगामा हुआ जब मुख्यमंत्री भगवंत मान और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा ने सदन के बीचों-बीच (वेल) जाकर मुख्यमंत्री के भाषण में बाधा डाली, जिसके बाद स्पीकर ने उन्हें सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया। जब पुलिस कर्मियों ने खैरा को जबरन उठाने की कोशिश की, तो कांग्रेस के अन्य विधायकों ने उन्हें घेर लिया और पुलिस के साथ उनकी धक्का-मुक्की हुई। बाद में खैरा को सदन से बाहर ले जाया गया। इस हंगामे के दौरान बीजेपी के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे।
सत्तारूढ़ आप नेताओं ने केंद्र के नए कानून विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन को गरीब विरोधी और संघीय ढांचे पर हमला करार दिया। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों में कटौती कर रही है और गरीबों के मुंह से निवाला छीन रही है। दूसरी ओर, सदन ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) की चुप्पी पर भी चुटकी ली और आरोप लगाया कि वे 2027 के चुनावों के लिए बीजेपी के साथ गठबंधन की उम्मीद में इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। पंजाब में मनरेगा एक बड़ा चुनावी मुद्दा है और इस प्रस्ताव के जरिए आप सरकार ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।