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पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग

देश में फिर से ब्लैक समर जैसे हालात बनते दिख रहे हैं

पर्थः पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की राजधानी पर्थ और उसके आसपास के ग्रामीण इलाके इस समय एक भयावह प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं। पिछले 12 घंटों में, इस क्षेत्र के जंगलों में लगी आग ने अनियंत्रित रूप धारण कर लिया है, जिससे 2019-20 के विनाशकारी ब्लैक समर की यादें ताजा हो गई हैं।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब पर्थ में तापमान ने दिसंबर के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए और शुष्क हवाओं की गति 60 किमी/घंटा तक पहुँच गई। इन तेज़ हवाओं ने आग की लपटों को ‘फायरबॉल’ में बदल दिया है, जो अब सीधे रिहायशी इलाकों और मानवीय बस्तियों की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई उपनगरीय कस्बों के लिए इमरजेंसी वार्निंग जारी की है। हजारों निवासियों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों या इवैक्युएशन सेंटर्स में जाने के लिए मात्र चंद घंटों का समय दिया गया है। अग्निशमन विभाग के सैकड़ों कर्मी जमीन पर आग से लड़ रहे हैं, जबकि दर्जनों वाटर-बॉम्बर विमान आसमान से पानी और फायर रिटार्डेंट रसायनों का छिड़काव कर रहे हैं। हालांकि, धुएं की मोटी चादर और पायरो-कम्युलोनिम्बस बादलों (आग से बनने वाले बादल) के कारण हवाई दृश्यता लगभग शून्य हो गई है, जिससे बचाव कार्यों में भारी रुकावट आ रही है।

स्थानीय निवासियों द्वारा साझा किए गए दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। पर्थ का आसमान दोपहर में ही गहरा नारंगी और काला हो गया है, और जलती हुई राख किसी बर्फबारी की तरह घरों की छतों पर गिर रही है। कई प्रमुख राजमार्गों को बंद कर दिया गया है, जिससे बिजली की आपूर्ति और संचार व्यवस्था ठप हो गई है।

इस आपदा का एक दुखद पहलू पर्यावरण और वन्यजीवों पर पड़ रहा प्रभाव है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पर्थ के बाहरी इलाकों में पाए जाने वाले दुर्लभ ब्लैक कॉकटू और क्वोका जैसे जीवों के प्राकृतिक आवास पूरी तरह नष्ट हो रहे हैं। जलवायु वैज्ञानिकों का मत है कि यह कोई सामान्य मौसमी घटना नहीं है;

हिंद महासागर के बढ़ते तापमान और ‘अल नीनो’ के प्रभाव के कारण ऑस्ट्रेलिया का शुष्क मौसम अब पहले से कहीं अधिक लंबा, गर्म और जानलेवा होता जा रहा है। यह आग इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जलवायु परिवर्तन अब एक भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि वर्तमान की एक भयानक वास्तविकता है।