Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Gwalior Dog Attack: ग्वालियर में आवारा कुत्ते का 6 साल के मासूम पर हमला; चेहरे पर लगे 100 टांके, हाल... Chhindwara Cough Syrup Case: 20 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; आरोपी डॉ... Indore Lokayukta Raid: महिला बाल विकास अधिकारी पर लोकायुक्त का छापा; 9 करोड़ से अधिक की संपत्ति का ख... MP Rajya Sabha Row: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस का प्रदर्शन; चुनाव आयोग के गेट... Gwalior Music Heritage Row: हद्दू खां सभागार से ध्रुपद केंद्र हटाने का प्रस्ताव खारिज; सदन में हुआ ज... Shivpuri News: छात्रावास की छात्राओं का फूटा गुस्सा; दूषित भोजन और बदहाल सुविधाओं को लेकर पहुंचीं कल... MP Govt News: सरकारी नौकरी के लिए 'दो बच्चों' की सीमा खत्म; मोहन सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को ... Chhindwara Industrial Land Row: 1200 एकड़ जमीन पर उद्योग या किसानों को वापसी; सांसद बंटी साहू ने सीए... Mandla Bus Accident: बम्हनी बंजर में मजदूरों से भरी बस मकान में घुसी; ड्राइवर पर लगा नशे में होने का... MP Politics: 'अगले लोकसभा चुनाव में जीतेंगे सभी 29 सीटें'; पीएम मोदी के नेतृत्व पर सीएम मोहन यादव का...

अरावली पहाड़ियों की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान

सोमवार को विशेष तीन सदस्यीय पीठ करेगी सुनवाई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलावों से उत्पन्न चिंताओं पर स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट को यह आशंका है कि इस कदम से अनियमित खनन और गंभीर पर्यावरणीय गिरावट का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की एक अवकाशकालीन पीठ सोमवार, 29 दिसंबर को इस मामले पर विचार करने वाली है।

अदालत का यह हस्तक्षेप अरावली की संशोधित परिभाषा के कारण होने वाले सार्वजनिक विरोध और पर्यावरणीय चिंताओं के मद्देनजर आया है। अरावली क्षेत्र अपनी पारिस्थितिक महत्ता और मरुस्थलीकरण को रोकने तथा भूजल स्तर को बनाए रखने में अपनी भूमिका के लिए पहचाना जाता है। पर्यावरण समूहों और नागरिक समाज संगठनों ने डर जताया है कि परिभाषा को कमजोर करने से उन क्षेत्रों में खनन और निर्माण गतिविधियों को वैधता मिल सकती है जो पहले संरक्षित थे।

गौरतलब है कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात राज्यों में अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परस्पर विरोधी परिभाषाओं के कारण नियामक खामियां और अवैध खनन की समस्या पैदा हुई थी। इसे हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस साल नवंबर में दिए गए फैसले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति द्वारा खनन के संदर्भ में अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों के लिए अनुशंसित परिचालन परिभाषा को स्वीकार कर लिया था।

इस परिभाषा के अनुसार, अरावली पहाड़ियों का तात्पर्य निर्दिष्ट जिलों में किसी भी ऐसे भू-भाग से है जिसकी स्थानीय धरातल से न्यूनतम ऊंचाई 100 मीटर है। वहीं अरावली श्रेणी तब बनती है जब ऐसी दो या दो से अधिक पहाड़ियाँ एक-दूसरे के 500 मीटर के दायरे में स्थित हों। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया था कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में किसी भी नई खनन गतिविधि की अनुमति देने से पहले सतत खनन के लिए एक व्यापक प्रबंधन योजना तैयार की जाए।