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भीषण हमले से रूस का यूक्रेन पर विंटर टेरर

ऊर्जा नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए दागीं सैकड़ों मिसाइलें

कीवः रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा रक्तपात 2025 के अंतिम दिनों में एक नए और अधिक भयानक चरण में प्रवेश कर चुका है। आज की ताजा रिपोर्टों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि रूसी सेना ने यूक्रेन के 13 अलग-अलग क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए एक साथ 650 से अधिक आत्मघाती ड्रोनों और लगभग 30 क्रूज मिसाइलों से हमला किया है।

यह हमला यूक्रेन के इतिहास में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किए गए सबसे बड़े और सबसे समन्वित हमलों में से एक माना जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इसे सर्दियों का आतंक करार देते हुए कहा कि यह नागरिकों का मनोबल तोड़ने और कड़ाके की ठंड में पूरी आबादी को बिना बिजली और गर्मी के मारने की एक सोची-समझी साजिश है।

इस बड़े सैन्य ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन के बिजली ग्रिडों, सबस्टेशनों और हीटिंग स्टेशनों को पूरी तरह नष्ट करना था। यूक्रेन में तापमान शून्य से नीचे गिर चुका है, और ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति का ठप होना जानलेवा साबित हो सकता है। राजधानी कीव, खार्किव और ओडेसा जैसे प्रमुख औद्योगिक और नागरिक केंद्रों में इस हमले के तुरंत बाद ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो गई।

यूक्रेनी वायु सेना ने यद्यपि यह दावा किया है कि उन्होंने अपनी रक्षा प्रणालियों के जरिए अधिकांश ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन गिरते हुए मलबे और कुछ घातक मिसाइलों के सीधे ठिकानों पर लगने से बुनियादी ढांचे को अपूरणीय क्षति हुई है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, कम से कम तीन निर्दोष नागरिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

इस कृत्य के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारी रोष है। विशेष रूप से यूरोपीय संघ ने इस हमले की तीखी आलोचना करते हुए इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा है। पश्चिमी देशों ने एकजुटता दिखाते हुए यूक्रेन को और अधिक उन्नत वायु रक्षा प्रणाली और ऊर्जा उपकरणों की तत्काल आपूर्ति करने का वादा किया है ताकि सर्दियों के दौरान होने वाली मौतों को रोका जा सके।

विश्लेषकों का मानना है कि रूस की यह आक्रामकता दर्शाती है कि वह फ्रंटलाइन के बजाय अब पीछे के नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर यूक्रेन को समर्पण के लिए मजबूर करना चाहता है। यह हमला स्पष्ट संकेत देता है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की शांति वार्ता संभव नहीं है और यह युद्ध 2026 में भी एक अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ रहा है।