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हेमंत सरकार है दलित विरोधी, कर रही है हकमारीः अमर कुमार बाउरी

रांचीः नगर निकाय चुनाव को लेकर वार्डों के तय हो रहे आरक्षण पर आवाज उठने लगी है. अमर कुमार बाउरी ने एससी आरक्षण पर सवाल खड़ा करते हुए हेमंत सरकार को घेरा. मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए सिर्फ एसटी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कोचिंग सुविधा देने पर आपत्ति जताई. उन्होंने दलितों की उपेक्षा का आरोप लगाया. वहीं नगर निकाय चुनाव में तय हो रहे वार्डों के आरक्षण पर सवाल खड़ा किया.

दलित समाज की स्थिति पहले जैसी हैः अमर कुमार बाउरी

उन्होंने राज्य सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा लगातार दलितों की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने को सही बताते हुए कहा कि आज भी इस समुदाय की वास्तविक स्थिति पहले जैसी ही है. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार जल, जंगल, जमीन और झारखंड वासियों की बात कर सत्ता में आयी थी. आज झारखंड के एससी की स्थिति दयनीय है. सरकार के एक मंत्री ने भी सरकार से लिखित आग्रह कर एससी की स्थिति को सुधारने का आग्रह किया है.

अमर कुमार बाउरी ने कहा कि झारखंड में सोमवार को एक नई योजना की शुरुआत की गई है. एससी बच्चों को विदेश में शिक्षा हेतु भेजने की मांग बहुत पहले सरकार से की गई थी. उन्होंने कहा कि झारखंड में 50 लाख एससी को उनका हक और अधिकार नहीं दिया जा रहा है. आज तक एससी बच्चों को नहीं भेजा गया. सरकार की योजनाओं में एससी कहीं नही है.

दलित विरोधी है हेमंत सरकारः अमर कुमार बाउरी

अमर कुमार बाउरी ने कहा कि नगर निगम, नगर पंचायत और नगर परिषद चुनाव में पिछड़ों को आरक्षण देने की मांग भी न्यायालय से की गई थी. रांची नगर निगम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रांची के मात्र 2 वार्ड में ही एससी को आरक्षण मिला है. सरकार राजनीतिक कारणों से एक वर्ग को दबाने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि दलितों ने झारखंड बनने के बाद संगठनात्मक ताकत नहीं दिखाई है, इसका मतलब यह नहीं कि एससी को नजरअंदाज किया जाए.

दलित समाज आंदोलन करने को मजबूर होंगेः अमर कुमार बाउरी

उन्होंने कहा कि सरकार ने अलग-अलग नगर निगम में अलग-अलग नियम लगाए हैं. सरकार न्यायालय के दबाव में आनन फानन में चुनाव की तैयारी कर रही है. उन्होंने मांग की है कि हेमंत सोरेन नगर निगम चुनाव में पारदर्शिता लाएं ताकि सभी वर्ग को न्याय मिल सके. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि सामाजिक संगठन जब पदाधिकारी से बात करते हैं तो पदाधिकारी सरकार की दुहाई देते नजर आते हैं. एससी को अपने हक और अधिकार के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है. अगर सरकार अपनी कमी को दूर नहीं करती तो आने वाले समय में दलित समाज बाबा साहेब के कानून के माध्यम से आंदोलन करने को मजबूर होगा.