रायपुर : रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए पांच दिवसीय स्किल डेवलेपमेंट शिविर का आयोजन किया गया है. शिविर में मूक बधिर और दृष्टि बाधित बच्चों के लिए विशेष प्लान तैयार किए गए हैं. ये पूरी तैयारी दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम और महावीर इंटरकॉन्टिनेंटल ऑर्गेनाइजेशन सर्विस ने किया है. इस शिविर में देश भर के 1200 दिव्यांगजन ट्रेनिंग ले रहे हैं.अलग-अलग ट्रेड में दक्ष ट्रेनर बच्चों को आसान तरीकों से स्किल डेवलेपमेंट करा रहे हैं.
मुखवास बनाना सीख रहे हैं दिव्यांगजन
दिव्यांगजनों को ट्रेनर के माध्यम से कार्डबोर्ड से आरती की थाली, कपड़े की माला, कपड़े के फूल, मुखवास बनाना जैसे कई तरह की चीजें सिखाई जा रही है.बच्चे अगर इन चीजों को पूरी मेहनत और लगन से सीखते हैं तो भविष्य में इसे रोजगार के रूप में अपनाकर अपना जीविकोपार्जन कर सकते हैं. मूक बघिर और दृष्टि बाधित बच्चों पूरी ईमानदारी और मेहनत से इन चीजों को सीखते हैं, तो हर महीने 10 से 15 हजार रुपए तक कमाई कर सकते हैं. मुखवास कैसे बनता है, इसमें क्या-क्या चीजें लगती हैं आईए जानते हैं.
ट्रेनिंग देने के लिए लगाए गए 50 स्टाल
ट्रेनर अंजू पारख ने बताया कि मूक बघिर और दृष्टि बाधित बच्चों के लिए स्किल डेवलपमेंट शिविर का आयोजन किया गया है. इस तरह की ट्रेनिंग लेकर बच्चे भविष्य में रोजगार कर सके. दृष्टि बाधित और मूक बधिर बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए 50 स्टाल लगाए गए हैं. जिसमें अलग-अलग तरह की चीजें बनाना इन बच्चों को सिखाया जा रहा है.
कम लागत में ज्यादा प्रॉफिट का काम
मुखवास बनाने में ऐसी चीजों चुना गया है, जिसकी लागत कम हो और प्रॉफिट ज्यादा ले सकें. इसमें सामान भी कम है. ज्यादा सामान होने से बच्चे भी परेशान हो सकते हैं. इस तरह की चीज सीखाने के पीछे हमारा मकसद होता है कि आज तो उनके पेरेंट्स है, तो ठीक है. कल के दिन उनको अपने पैरों पर खड़ा होना पड़े और उनके पैरेंट्स उनका सपोर्ट ना कर सके तो बच्चों के पास ये कला रहेगी.
अंजू पारख के मुताबिक बच्चे इस तरह की कला सीखकर लगभग 10 हजार रुपए से लेकर 15 हजार रुपए तक महीना कमा सकते हैं. अगर वे अच्छे से इसे सीखकर कुछ करना चाहते हैं तो इतनी कमाई इन बच्चों की हो सकती है. कम मेहनत में कम समान में इंटरेस्टिंग लगे ऐसा मेथड तैयार की हूं कि जिसमें वो इंटरेस्ट लेकर इसे कर सकें.