Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Ujjain Mahakal: माथे पर तिलक और गले में माला, महाकाल मंदिर में पहचान छिपाकर घूम रहा था मुस्लिम युवक,... Bhiwadi Factory Blast: भिवाड़ी में कपड़े की फैक्ट्री में चल रहा था पटाखों का अवैध काम, धमाके में 7 क... Crime News: शादी की बात करने पहुंचे बॉयफ्रेंड पर भाइयों का खौफनाक हमला, ब्लेड से रेता गला; लगे 18 टा... MP Congress Recruitment: मध्य प्रदेश कांग्रेस में प्रवक्ताओं की भर्ती, 'टैलेंट हंट' के जरिए मिलेगी न... Jodhpur Sadhvi Prem Baisa Case: साध्वी प्रेम बाईसा की मौत मामले में 20 दिन बाद FIR दर्ज, कंपाउंडर पर... Delhi Zoo Animal Adoption: अब आप भी गोद ले सकते हैं बाघ और हिरण, दिल्ली चिड़ियाघर ने जारी की जानवरों... Weather Update 2026: दिल्ली में अगले 24 घंटे में बारिश का 'Yellow Alert', पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर... Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों को कैसे करें प्रसन्न? राशि अनुसार दान से चमक जाएगी ... झांसी में खौफनाक वारदात: होटल मैनेजर को बेल्टों से 40 बार बेरहमी से पीटा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान! 'कुर्सी के लायक नहीं राहुल गांधी...' नवजोत कौर सिद्धू का कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आ...

उत्तर प्रदेश में बीजेपी का नया दांव! ओबीसी कार्ड के जरिए अध्यक्ष पद पर बड़ा फैसला, रविवार को होगा ऐलान, कौन संभालेगा कमान?

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को जल्द ही अपना नया अध्यक्ष मिल सकता है. इस सप्ताह यूपी बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव होना है. शनिवार को चुनाव का ऐलान और नामांकन प्रक्रिया होगी. रविवार को औपचारिक चुनाव और नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा संभव है. केंद्र में बड़े नेताओं को लखनऊ पहुंचने के लिए कहा गया है. संभावना है कि इस पद की जिम्मेदारी ओबीसी नेता को मिल सकती है.

यूपी में बीजेपी की कमान किसे मिलेगी, इस पर बेशक अभी सस्पेंस बना हुआ है लेकिन ये तय है कि ये जिम्मेदारी सौंपते हुए पार्टी भविष्य की दशा-दिशा तय करेगी. सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए पार्टी ये फैसला लेगी. हर कदम 2027 के चुनावों को देखते हुए उठाया जाएगा. पार्टी को प्रदेश में ऐसे नेता की तलाश है जो विपक्ष खासकर सपा के पीडीए फॉर्मूले पर भारी पड़े.

लंबे समय तक इस पशोपेश में दिखी बीजेपी

प्रदेश की बागडोर योगी आदित्यनाथ के हाथ में है. सत्ता के रथ पर उनके साथ दो डिप्टी सीएम सवार हैं. जिसमें ब्रजेश पाठक ब्राह्मण और केशव प्रसाद मौर्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं. इसी के चलते बीजेपी लंबे समय तक इसी पशोपेश में दिखी है कि प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर किसे थमाई जाए. इस पद के लिए पहले चर्चा दलित वर्ग के नेता को लेकर भी तेज थी.

केशव-स्वतंत्र सिंह फिर भूपेंद्र को बागडोर

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के रिकॉर्ड को देखें तो पिछले 3 अध्यक्ष ओबीसी समुदाय से रहे हैं. साल 2014 के बाद केशव प्रसाद, फिर स्वतंत्र देव सिंह और भूपेंद्र चौधरी को पार्टी ने ये जिम्मेदारी सौंपी. पूर्व में अटकलें ये भी तेज थीं कि बीजेपी सवर्ण समाज से आने वाले नेता को बागडोर सौंप सकती है. हालांकि, सीएम योगी सवर्ण समाज से आते हैं, ऐसे में इसकी संभावना कम ही दिखती है.

अब जब इसी हफ्ते बीजेपी को अपना नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है तो यहां अहम बात ये होगी कि पार्टी हर फैसला विधानसभा चुनाव को केंद्र रखकर ही करेगी. इसकी वजह है कि यूपी के चुनाव में जातीय समीकरण सबसे बड़ा फैक्टर है. लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान को देखते हुए पार्टी हर कदम फूंक-फूंककर रखेगी.