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राजस्थान में India-UK का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘AJEYA WARRIOR-25’ हुआ सम्पन्न! उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को मिला सम्मान, बढ़ी दोनों देशों की सैन्य ताकत

राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और ब्रिटेन के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास अजेय वॉरियर-25 ( AJEYA WARRIOR-25) आज ( रविवार, 30 नवंबर) सफलतापूर्वक समाप्त हो गया. यह अभ्यास करीब दो हफ्ते तक चला, जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त रूप से आतंकवाद-रोधी अभियानों और अर्ध-शहरी इलाकों में कार्रवाई की ट्रेनिंग की.

यह पूरा अभ्यास संयुक्त राष्ट्र (UN) के जनादेश के तहत आयोजित किया गया था. इस 8वें संस्करण में दोनों देशों के कुल 240 सैनिकों ने हिस्सा लिया. इस अभ्यास में दोनों देशों की टुकड़ियों ने विभिन्न कठिन और तकनीकी गतिविधियां पूरी कीं. भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट और ब्रिटेन की रॉयल गोरखा राइफल्स के जवानों ने साथ मिलकर टैक्टिकल ड्रिल्स, कॉम्बैट ट्रेनिंग, हेलिबोर्न ऑपरेशंस, कमरे में घुसकर कार्रवाई (रूम इंटरवेंशन), और कॉर्डन-एंड- सर्च जैसे अभ्यास किए. इसके साथ ही इस अभ्यास के दौरान कई ऑपरेशनल चर्चाएं और योजना-सत्र भी आयोजित किए गए.

दोनों सेनाओं का बेहतरीन प्रदर्शन

अंतिम चरण में दोनों सेनाओं ने बेहतरीन तालमेल, सटीकता और संयुक्त क्षमता का प्रदर्शन किया. समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को सम्मानित किया गया. इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत के तहत भारतीय स्वदेशी हथियारों और उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई.

भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग और मजबूत

AJEYA WARRIOR-25 ने भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाया और दोनों देशों की वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दोहराया. यह 14 दिवसीय द्विपक्षीय युद्धाभ्यास 17 से 30 नवंबर तक चला. संयुक्त राष्ट्र के दिशानिर्देशों के अनुरूप आयोजित इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अर्ध-शहरी इलाकों में आतंक विरोधी अभियानों की अभिसंचालन क्षमता बढ़ाना था.

2011 से हर 2 साल में होता आ रहा आयोजन

अजेय वॉरियर श्रृंखला का आयोजन 2011 से हर 2 साल में होता आ रहा है. भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच पिछला संयुक्त सैन्य अभ्यास “अजेय वारियर-23” का सातवां संस्करण 2023 में यूनाइटेड किंगडम के सैलिसबरी प्लेन्स में आयोजित किया गया था.अजेय वॉरियर’ जैसे युद्धाभ्यास जटिल अभियानों में समन्वित प्रतिक्रिया क्षमता, तकनीकी परस्परता और सामरिक कौशल को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.