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एल्गार परिषद मामले में ज्योति जगताप को जमानत

पांच वर्षों तक जेल में रहने के बाद अंततः सुनवाई हुई

  • सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाया

  • हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी

  • कोरेगांव भीमा हिंसा से जुड़ा मामला

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में गिरफ्तार कार्यकर्ता ज्योति जगताप को बड़ी राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी है। जगताप को साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में थीं। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश तब पारित किया जब सुश्री जगताप की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपर्णा भट ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल पिछले पांच वर्षों से हिरासत में हैं। मामले में वकील करिश्मा मारिया भी सुश्री जगताप का पक्ष रखने के लिए उपस्थित थीं।

इससे पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि सुश्री जगताप कबीर कला मंच (केकेएम) समूह की एक सक्रिय सदस्य थीं। अदालत ने कहा था कि 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन के दौरान अपने मंच नाटक में इस समूह ने न केवल आक्रामक, बल्कि अत्यधिक भड़काऊ नारे भी लगाए थे।

हाईकोर्ट ने कहा था, हमारा यह सुविचारित मत है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया सत्य मानने के उचित आधार हैं, जिसमें अपीलकर्ता (सुश्री जगताप) पर आतंकवादी कृत्य की साजिश रचने, प्रयास करने, वकालत करने और उकसाने का आरोप है। एनआईए के अनुसार, कबीर कला मंच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का एक प्रमुख संगठन (फ्रंट ऑर्गेनाइजेशन) है।

कार्यकर्ता-सह-गायिका ज्योति जगताप ने विशेष अदालत द्वारा फरवरी 2022 में जमानत देने से इनकार करने वाले आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2017 का एल्गार परिषद सम्मेलन पुणे शहर के मध्य में स्थित 18वीं शताब्दी के महल- किले, शनिवारवाड़ा में आयोजित किया गया था।

सुश्री जगताप पर अन्य केकेएम सदस्यों के साथ सम्मेलन में भड़काऊ नारे लगाने और गाने का आरोप है। उन्हें सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में बंद हैं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के कारण ही 1 जनवरी, 2018 को पुणे के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़क उठी थी। पांच साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली यह अंतरिम जमानत जगताप के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है।