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संदिग्ध हमलावर कई फोनों का प्रयोग कर नूह भागा

दिल्ली विस्फोट जाँच की गाड़ी लगातार आगे बढ़ रही

  • किराये के मकान से भी जानकारी मिली

  • दिन में कभी कमरे से बाहर नहीं आता था

  • नौ नवंबर की रात को अचानक निकल गया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः लाल किले के पास हुए विस्फोट की आगे की जाँच में संदिग्ध डॉ. मोहम्मद उमर उन-नबी से संबंधित नए और महत्वपूर्ण विवरण सामने आए हैं। इन खुलासों से पता चला है कि वह विस्फोट से एक दिन पहले तक हरियाणा के नूह में रुका था और उसने जाँच को चकमा देने के लिए कई मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था। राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले के पास एक हुंडई आई20 कार में विस्फोट होने के बाद बारह लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। यह घटना पूरे देश में सनसनी फैला गई थी।

मामले की जाँच से अब यह सामने आया है कि उमर उन-नबी, जिस पर एक व्हाइट कॉलर आतंकी समूह का हिस्सा होने का आरोप है, वह दिल्ली में विस्फोट से एक दिन पहले तक नूह में एक किराये के कमरे में छिपा हुआ था। पुलिस के अनुसार, उसने फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज को तभी छोड़ दिया था जब उसका करीबी सहयोगी डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई पकड़ा गया था।

घटना से कुछ दिन पहले की सीसीटीवी फुटेज में उसे आई20 कार के साथ एक प्रदूषण केंद्र पर और एक मोबाइल फोन की मरम्मत करवाते हुए देखा गया था। हालाँकि, शकील गनई की गिरफ्तारी के बाद घटनाक्रम ने पूरी तरह से मोड़ ले लिया।

जाँच रिकॉर्ड के अनुसार, नबी 30 अक्टूबर को शोभा खान की मदद से नूह भाग गया। शोभा खान अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नर्सिंग स्टाफ की सदस्य है। खान ने नबी को अपनी साली अफ़साना के घर पर जगह दिलाने में मदद की, जहाँ अफ़साना ने उसे अपने चार कमरों में से एक कमरा 6,000 रुपये में किराए पर दिया। इस राशि में 2,000 मासिक किराया और 4,000 सुरक्षा राशि शामिल थी।

यह विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि उमर उन-नबी ज्यादातर अपने कमरे में ही रहता था और केवल रात में ही बाहर निकलता था, जैसा कि अफ़साना की बेटी ने बताया। उसने कहा, वह दिन के दौरान कभी भी कमरे से बाहर नहीं आया। उसके पास दो स्मार्टफोन थे और वह अँधेरा होने के बाद ही बाहर निकलता था, मुख्य रूप से सड़क किनारे खाने की दुकानों से रात का खाना खाने के लिए।उसने आगे बताया, वह बहुत गंभीर प्रतीत होता था, किसी से बात नहीं करता था, और ग्यारह दिनों तक एक ही कपड़ों में रहा।

अफ़साना की बेटी ने आगे चौंकाने वाली जानकारी देते हुए कहा, वह 9 नवंबर की रात को अचानक चला गया। कमरा बदबू मार रहा था और हम डर गए थे। बाद में, हमने टीवी पर बम विस्फोट के बारे में सुना, फिर पुलिस आई और मेरे मामा और माँ को पूछताछ के लिए ले गई। वे अभी तक वापस नहीं आए हैं।

दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए बताया कि विस्फोट से लगभग ग्यारह दिन पहले उमर उन-नबी को फरीदाबाद में एक मोबाइल फोन की दुकान पर कम से कम दो फोन ले जाते हुए देखा गया था। इन विवरणों से स्पष्ट होता है कि संदिग्ध जाँच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए लगातार अपनी लोकेशन और संचार के साधनों को बदल रहा था, जो उसकी सुनियोजित आतंकी साजिश की ओर इशारा करता है। उसकी गिरफ्तारी और उसके समूह के पर्दाफाश से ही इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझ पाएगी।