Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal News: बंगाल में 1 जून से महिलाओं को मिलेंगे ₹3000, शुभेंदु सरकार का 'अन्नपूर्णा भंडार' प... पीएम मोदी का वडोदरा से संबोधन: 'वर्क फ्रॉम होम' अपनाएं और सोने की खरीदारी टालें, जानें क्या है वजह Mira Bhayandar News: काशीमीरा में शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने पर बवाल, सरनाईक और मेहता आमने-सामने BRICS Meeting Delhi: दिल्ली में जुटेगा BRICS, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर होगी चर्चा Rewa News: तिलक के दौरान दूल्हे के अफेयर का खुलासा, शादी से मना करने पर लड़की पक्ष को दौड़ा-दौड़कर प... Secunderabad News: बीटेक छात्र यवन की हत्या का खुलासा, लड़की के पिता-भाई समेत 10 आरोपी गिरफ्तार UP BJP Meeting Lucknow: 2027 चुनाव का रोडमैप तैयार करेगी BJP, लखनऊ में 98 जिलाध्यक्षों की बड़ी बैठक Katihar Crime News: कटिहार में मानवता शर्मसार, नाबालिगों को खूंटे से बांधकर पीटा, सिर मुंडवाकर जबरन ... Jamshedpur Triple Murder: जमशेदपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने पत्नी और दो बच्चों को उतार... मानव को अंगों को उगाने में मदद करेगा

वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर पर घटता भरोसा

दुनिया के अपने डंडे से हांक रहे डोनाल्ड ट्रंप की परेशानी

लंदनः वैश्विक आर्थिक मंच पर अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती मिलती दिख रही है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स द्वारा हाल ही में जारी एक शोध रिपोर्ट ने दुनिया भर के नीति निर्माताओं और निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट, जिसका शीर्षक शिफ्टिंग इकोनॉमिक ग्रेविटी इन ए ग्लोबल रीबैलेंस है, स्पष्ट रूप से बताती है कि अमेरिकी डॉलर, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से वैश्विक व्यापार की रीढ़ रहा है, अब निवेशकों का भरोसा खो रहा है।

यह प्रवृत्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े संरचनात्मक बदलावों का संकेत देती है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का आर्थिक गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदल रहा है, और यह बदलाव मुख्य रूप से अमेरिका की आंतरिक वित्तीय और राजनीतिक चुनौतियों के कारण हो रहा है।

रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता का विषय अमेरिकी सरकार का बढ़ता राजकोषीय घाटा और कर्ज है। यह कर्ज सकल घरेलू उत्पाद  के 180 प्रतिशत को पार कर चुका है। अर्थशास्त्री इसे राजकोषीय निर्णायक बिंदु मान रहे हैं, जिसके कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।

अमेरिका में राजनीतिक गतिरोध और राजकोषीय स्तर पर आत्मतुष्टि की भावना ने आर्थिक नीतियों की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे वैश्विक निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाशने पर मजबूर हो रहे हैं। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक ब्याज दरों को बनाए रखने के बजाय, फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की आशंका है।

इससे फेड की स्वायत्तता पर संदेह पैदा होता है, जो डॉलर की विश्वसनीयता के लिए खतरा है। अमेरिका की चुनौतियों के समानांतर, चीन का निरंतर और मजबूत आर्थिक उदय हो रहा है। चीन वैश्विक पटल पर एक वैकल्पिक आर्थिक ध्रुव के रूप में उभर रहा है, जो डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है।

रिपोर्ट में वर्ष 2060 तक वैश्विक बेंचमार्क मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मूल्य में 20 प्रतिशत तक की महत्वपूर्ण गिरावट की भविष्यवाणी की गई है। यह गिरावट डॉलर-आधारित परिसंपत्तियों के मूल्य को प्रभावित कर सकती है।

भू-राजनीतिक पुनर्गठन: डॉलर पर घटता भरोसा केवल एक मौद्रिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी भू-राजनीतिक परिणाम होंगे। यह परिवर्तन दुनिया भर के देशों के बीच गठबंधन, पूंजी प्रवाह और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को नया रूप दे सकता है।

निष्कर्ष यह बताते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक दो शक्ति केंद्रों वाली व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहाँ अमेरिका का वित्तीय वर्चस्व धीरे-धीरे कम होता जाएगा और चीन जैसे उभरते बाजारों का प्रभाव बढ़ेगा।

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की यह रिपोर्ट एक गंभीर चेतावनी है कि अमेरिका को अपनी राजकोषीय नीतियों में तत्काल सुधार की आवश्यकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में संतुलन बदल रहा है, और यदि अमेरिकी अपनी वित्तीय स्थिरता को बहाल नहीं करते हैं, तो डॉलर का निर्विवाद प्रभुत्व इतिहास बन सकता है, जिससे वैश्विक वित्त और व्यापार एक नए, कम निश्चितता वाले युग में प्रवेश कर जाएंगे।