झारखंड कांग्रेस में सांगठनिक फेरबदल का दूसरे मायने
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आजसू और झामुमो दोनों ही निशाने पर
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पिछड़ों में पैठ बनाने की नई कोशिश प्रारंभ
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जयप्रकाश पटेल पहले झामुमो में ही थे
राष्ट्रीय खबर
रांची: आगामी चुनावों और संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने के उद्देश्य से झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश के 20 जिलों में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की है, जबकि पांच जिलों में पुराने चेहरों को ही बरकरार रखा गया है। यह फेरबदल संगठन सृजन अभियान के तहत किया गया है, जिसके लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षकों ने जिलों का दौरा कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी सूची में कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, जो संगठन में नई ऊर्जा लाने की पार्टी की रणनीति को दर्शाता है। इस सूची में दो मौजूदा विधायक – ममता देवी (रामगढ़) और भूषण बाड़ा (सिमडेगा) – को भी जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, हजारीबाग के लिए पूर्व विधायक जयप्रकाश भाई पटेल पर भरोसा जताया गया है। पार्टी ने बोकारो के लिए जवाहर लाल मेहता, रांची महानगर के लिए कुमार राजा और धनबाद के लिए संतोष कुमार सिंह जैसे नेताओं को कमान सौंपी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल में सामाजिक और जातीय समीकरणों का भी खास ध्यान रखा गया है, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है।
हालांकि, इन बदलावों के साथ ही कुछ जिलों में आंतरिक असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, धनबाद में संतोष कुमार सिंह की पुनर्नियुक्ति को लेकर स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने विरोध जताया है, जिन्होंने नेतृत्व पर जमीनी राय की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
संगठन के इस व्यापक सुदृढ़ीकरण को झारखंड में आसन्न स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि ये नियुक्तियाँ संगठन को और अधिक गतिशील बनाकर, राज्य में पार्टी की पकड़ को मज़बूत करेंगी। शीघ्र ही प्रदेश कांग्रेस की नई कमेटी की घोषणा होने की भी संभावना है, जिसके छठ पर्व के बाद काम करना शुरू करने की उम्मीद है।
संगठन को मजबूत करने के नाम पर अब मौका देखकर चौका लगाने की कांग्रेस की सोच भी स्पष्ट हो जाती है। रामगढ़ और आसपास के इलाके में झामुमो और आजसू का जनाधार मजबूत रहा है। रामगढ़ से चंद्रप्रकाश चौधरी से अन्य सीट से सांसद बनने के बाद से भाजपा ने भी हाथ पैर मारे थे। अब कांग्रेस ने जयप्रकाश पटेल और ममता देवी के जरिए इन दोनों ही दलों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की चाल चली है। इनमें से जयप्रकाश पटेल दरअसल झामुमो के ही पूर्व विधायक और मंत्री रहे हैं। नाराजगी की वजह से वह भाजपा में चले गये थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गये। अब जातिगत समीकरणों को साधने की यह चाल धीरे धीरे स्पष्ट हो रही है।