हादसे की जानकारी मिलते ही आपदा प्रतिक्रिया बल रवाना
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के उत्तरी चेन्नई थर्मल पावर स्टेशन में हुई एक भयावह दुर्घटना में नौ श्रमिकों की मृत्यु हो गई, जबकि कम से कम पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर देश के प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा संयंत्रों में कार्यस्थल सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह दुर्घटना बिजली संयंत्र के एक निर्माणाधीन स्टील संरचना के अचानक गिरने की वजह से हुई है।
हादसे की सूचना मिलते ही आपातकालीन प्रतिक्रिया दल और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं। हालाँकि, मलबे का विशाल ढेर और साइट की दुर्गमता के कारण बचाव अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा। घायल श्रमिकों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। प्रशासन ने मारे गए श्रमिकों के परिवारों के प्रति गहरा दुख व्यक्त किया है और उनके लिए पर्याप्त मुआवजे की घोषणा की है।
इस दुर्घटना ने श्रम संगठनों और विपक्षी दलों को राज्य सरकार तथा संबंधित बिजली बोर्ड के खिलाफ मुखर कर दिया है। उनका आरोप है कि संयंत्र में वर्षों से उचित रखरखाव और सुरक्षा ऑडिट की अनदेखी की जा रही थी। श्रमिकों के अनुसार, बॉयलर और अन्य उपकरणों की नियमित जाँच में लापरवाही बरती गई, जिसने अंततः इस घातक विफलता का रूप ले लिया। मामले की उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दे दिए गए हैं, जिसमें विशेषज्ञ पैनल दुर्घटना के वास्तविक कारणों, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और संचालन प्रोटोकॉल के पालन की समीक्षा करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह दुर्घटना केवल एक तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक समस्या की ओर इशारा करती है जहाँ उत्पादन के दबाव में कर्मचारियों की सुरक्षा को गौण कर दिया जाता है। इस हादसे के बाद, अब यह मांग उठ रही है कि केवल इस प्लांट के लिए ही नहीं, बल्कि देश भर के सभी थर्मल पावर स्टेशनों और बड़े औद्योगिक परिसरों के लिए एक अनिवार्य और कठोर राष्ट्रव्यापी सुरक्षा ऑडिट कार्यक्रम चलाया जाए। इस त्रासदी से यह सबक लेना आवश्यक है कि ढांचागत अखंडता और मानव जीवन की सुरक्षा किसी भी कीमत पर समझौता करने योग्य नहीं है। यह घटना हमेशा के लिए उन नौ परिवारों पर दुख का पहाड़ तोड़ गई है, जिनके मुखिया अब कभी घर लौटकर नहीं आएंगे।