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सुशीला कार्की के नाम पर राष्ट्रपति ने पेंच फंसाया

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल अब भी कायम

  • हिंसा में अब तक कुल 51 लोग मारे गये

  • मरने वालों में एक भारतीय महिला शामिल

  • सेना प्रमुख ने शीतल निवास का दौरा किया

राष्ट्रीय खबर

काठमांडूः नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक नए समाधान की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब उस पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने पर लगभग सहमति बन गई थी, लेकिन राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने एक नई अड़चन पैदा कर दी है। दरअसल, जेन-जेड आंदोलनकारी और सुशीला कार्की दोनों ही यह शर्त रख रहे हैं कि अंतरिम सरकार के गठन से पहले संसद को भंग कर दिया जाए। राष्ट्रपति पौडेल इस मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे पूरा मामला अधर में लटक गया है।

शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में राष्ट्रपति पौडेल और सुशीला कार्की के बीच एक निर्णायक बैठक होने वाली थी, जिसका मकसद संवैधानिक और कानूनी जटिलताओं को सुलझाना था। यह उम्मीद की जा रही थी कि इस बैठक के बाद कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले लेंगी, लेकिन यह बातचीत शुरू ही नहीं हो पाई। नेपाली समाचार आउटलेट खबरहब ने जेन-जेड नेता आंशिक तमांग के हवाले से बताया कि आंदोलनकारी समूह राष्ट्रपति के साथ लगातार संपर्क में है, लेकिन संसद भंग करने की उनकी मुख्य शर्त अभी तक पूरी नहीं हुई है।

इस बीच, सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने शुक्रवार को शीतल निवास का दौरा किया। वे राष्ट्रपति की ओर से आंदोलनकारियों के साथ बातचीत में भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, उनका यह दौरा इस जटिल स्थिति को सुलझाने और कार्की के प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से किया गया था। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि नेपाल में मौजूदा राजनीतिक संकट कितना गंभीर हो चुका है, जिसमें सेना को भी मध्यस्थता के लिए आगे आना पड़ा है।

सुशीला कार्की ने यह वादा किया है कि वह छह महीने के लिए अंतरिम सरकार का नेतृत्व करेंगी और उसके बाद देश में आम चुनाव कराए जाएंगे। राष्ट्रपति पौडेल भी चुनाव कराने पर सहमत हैं, लेकिन संसद को भंग करने पर उनका अड़ियल रुख बना हुआ है। यह मतभेद ही मौजूदा राजनीतिक गतिरोध का मुख्य कारण है।

इसी बीच, सोमवार को शुरू हुए जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों ने एक दुखद मोड़ ले लिया है। नेपाल पुलिस के केंद्रीय प्रवक्ता डीआईजी बिनोद घिमिरे ने पुष्टि की है कि इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में काठमांडू घाटी और अन्य जिलों के लोग शामिल हैं, जिनमें तीन पुलिसकर्मी और एक भारतीय महिला भी शामिल हैं।

यह बढ़ती हुई मृतक संख्या इस बात का संकेत है कि नेपाल में स्थिति कितनी नाजुक और अस्थिर हो चुकी है। जब तक राष्ट्रपति और आंदोलनकारी समूह के बीच संसद भंग करने के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बनती, तब तक नेपाल में राजनीतिक और सामाजिक अशांति बनी रहेगी।