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मनोज जरांगे से अपना अनशन आखिरकार समाप्त किया

मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र सरकार सहमत

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः मनोज जरांगे ने आखिरकार मराठा आरक्षण के लिए अपनी लड़ाई जीत ली है। लंबे समय तक चले आंदोलन और भूख हड़ताल के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनकी मांग मान ली है और मराठा समुदाय को कुनबी जाति का दर्जा देने पर सहमत हो गई है। यह एक ऐतिहासिक फैसला है जो मराठाओं के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का रास्ता खोलता है, क्योंकि कुनबी समुदाय पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षित है।

यह जीत मनोज जरांगे के अथक प्रयासों का नतीजा है, जिन्होंने महीनों तक विरोध प्रदर्शन किए और कई बार आमरण अनशन किया। उनके आंदोलन की शुरुआत 2021 में पिंपलगांव में 90 दिनों के विरोध प्रदर्शन से हुई थी, लेकिन 2023 में जालना में हुए उनके बड़े आंदोलन ने इस मुद्दे को पूरे राज्य में चर्चा में ला दिया। इस दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद यह आंदोलन और भी ज़्यादा सुर्खियों में आ गया।

महाराष्ट्र सरकार ने इस आंदोलन को खत्म करने के लिए गजट जारी किया है, जिसमें मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र देने का प्रावधान है। सरकार का यह कदम न केवल मराठा समुदाय के लिए कई अवसर पैदा करेगा, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है। सरकार की सहमति के बाद, मनोज जरांगे ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है और मुंबई के आजाद मैदान से भी आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की है।

सरकार ने मनोज जरांगे की कुछ और मांगों पर भी सहमति जताई है। इनमें आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना और आंदोलनकारियों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन लेना शामिल है। इसके अलावा, सरकार ने आंदोलनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा भी किया है।

इस फैसले के बाद महाराष्ट्र के आरक्षण परिदृश्य में बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य में पहले से ही कई जातियों को आरक्षण मिल रहा है, जिसमें ओबीसी को सबसे ज्यादा (19 प्रतिशत), अनुसूचित जाति (एसटी एसटी बौद्ध) को 13 प्रतिशत, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। अब, मराठाओं को भी ओबीसी के तहत आरक्षण का लाभ मिलेगा। मनोज जरांगे की यह जीत दिखाती है कि एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प और सामूहिक आंदोलन कैसे बड़े बदलाव ला सकता है। यह फैसला मराठा समुदाय के लिए एक नई सुबह लेकर आया है और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान में मील का पत्थर साबित हो सकता है।