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दुर्लभ तारों की टक्कर का दृश्य देखा गया, देखें वीडियो

हब्बल स्पेस टेलीस्कोप की तैनाती का एक और लाभ

  • वारविक विश्वविद्यालय की शोध है यह

  • श्वेत बौने तारे की हुआ अध्ययन

  • भविष्य के शोध में मददगार होगी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः खगोल विज्ञान की दुनिया में एक रोमांचक और दुर्लभ खोज हुई है, जिसने वैज्ञानिकों को अचंभित कर दिया है। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के खगोलविदों ने एक सफेद बौने तारे का गहन अध्ययन किया है और पाया है कि यह दरअसल दो तारों के टकराव से बना हुआ है। हबल स्पेस टेलीस्कोप की पराबैंगनी वेधशालाओं से मिले डेटा के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है, जिसने इस तारे के गर्म वातावरण में मौजूद कार्बन के छोटे-से अंश को उजागर किया। यह खोज खगोल विज्ञान के लिए एक बड़ा कदम है और तारकीय विकास को समझने में एक नई दिशा प्रदान करती है।

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श्वेत बौने तारे, जिन्हें अक्सर तारकीय अंगार कहा जाता है, वे तारे होते हैं जो अपने जीवन के अंतिम चरण में होते हैं। जब एक तारा अपना सारा ईंधन जला लेता है, तो उसका बाहरी आवरण फैल जाता है और वह एक लाल विशालकाय तारा (red giant star) बन जाता है। इसके बाद, यह तारा अपनी बाहरी परतों को अंतरिक्ष में छोड़ देता है, और पीछे एक बहुत ही घना कोर बचता है, जिसे श्वेत बौना तारा कहा जाता है।

वारविक विश्वविद्यालय के खगोलविदों ने डब्ल्यूडी 0525 प्लस 526 नामक एक अल्ट्रा-मैसिव श्वेत बौने तारे का अध्ययन किया, जो पृथ्वी से लगभग 130 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। इस तारे का द्रव्यमान हमारे सूर्य से 20 प्रतिशत अधिक है। डॉ स्नेहलता साहू के नेतृत्व में की गई इस खोज में हबल स्पेस टेलीस्कोप के डेटा का इस्तेमाल किया गया। इन पराबैंगनी वेधशालाओं ने इस तारे के हाइड्रोजन-समृद्ध वायुमंडल में कार्बन के छोटे-छोटे संकेत पाए। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुराग था।

डॉ. साहू ने बताया, आमतौर पर, हाइड्रोजन और हीलियम श्वेत बौने तारे के चारों ओर एक मोटी परत बनाते हैं, जिससे कार्बन जैसे तत्व अंदर छिपे रहते हैं। लेकिन डब्ल्यूडी 0525 प्लस 526 में, ये परतें बहुत पतली हैं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि ये दो तारों के विलय के दौरान जल गई होंगी।

इस खोज में, वैज्ञानिकों ने पाया कि डब्ल्यूडी 0525 प्लस 526 की सतह पर कार्बन की मात्रा अन्य विलय-अवशेषों की तुलना में 100,000 गुना कम है। यह इस बात का सबूत है कि यह श्वेत बौना तारा अपने पोस्ट-विलय चरण में बहुत शुरुआती अवस्था में है।

एक और दिलचस्प बात यह है कि यह तारा इतना गर्म है कि इसमें कार्बन को सतह पर लाने वाला सामान्य संवहन प्रक्रिया काम नहीं कर रही है। वारविक के खगोलविद एंटोनी बेडार्ड ने बताया, हमने एक नई प्रक्रिया की पहचान की है, जिसे सेमी-कन्वेक्शन कहा जाता है, जो इस तारे के वायुमंडल में कार्बन को धीरे-धीरे सतह तक ला रही है।

यह पहली बार है जब किसी श्वेत बौने तारे में इस प्रक्रिया को देखा गया है। यह खोज तारकीय विलय और बाइनरी स्टार सिस्टम के भविष्य को समझने में मदद करेगी। जैसे-जैसे यह ठंडा होता जाएगा, इसकी सतह पर और अधिक कार्बन दिखाई देगा। हबल की यह शानदार खोज हमें एक दुर्लभ तारकीय घटना के शुरुआती चरणों की एक झलक देती है और भविष्य के खगोलीय अध्ययनों के लिए एक नया मानदंड स्थापित करती है।