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एक बौना तारा निगल रहा है बर्फीले ग्रह को

सौरमंडल की एक और अजीब घटना पर हबल का ध्यान गया

  • ब्रह्मांड के घटनाक्रमों की जानकारी है

  • पैराबैंगनी रोशनी से इसे देखा गया है

  • हमारे सूर्य के साथ भी ऐसा ही होगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः नासा के प्रतिष्ठित हबल स्पेस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष में एक असाधारण और खगोलीय रूप से महत्वपूर्ण घटना को कैद किया है। वैज्ञानिकों ने एक सफेद बौने तारे को देखा है जो अपने विशाल गुरुत्वाकर्षण बल के कारण एक प्लूटो जैसे बर्फीले ग्रह के टुकड़े को धीरे-धीरे निगल रहा है। यह घटना न केवल ब्रह्मांड में होने वाली विनाशकारी प्रक्रियाओं को दिखाती है, बल्कि हमारे अपने सौरमंडल के संभावित भविष्य की एक झाँकी भी प्रस्तुत करती है।

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सफेद बौना तारा, एक मृत तारा होता है जो हमारे सूर्य जैसे किसी तारे के अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद बनता है। यह तारा अपने बाहरी गैसीय परतों को अंतरिक्ष में छोड़ देता है और इसका केंद्र सिकुड़कर पृथ्वी के आकार के एक अत्यंत सघन पिंड में बदल जाता है। यह सफेद बौना तारा, जिसका अध्ययन किया गया है, हमारे सूर्य के द्रव्यमान का लगभग आधा है, लेकिन इसे पृथ्वी के समान आकार में संकुचित किया गया है, जिसके कारण इसका गुरुत्वाकर्षण बल अविश्वसनीय रूप से मजबूत हो जाता है।

यह सफेद बौना तारा पृथ्वी से लगभग 260 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। यह दूरी खगोलीय दृष्टि से बहुत कम मानी जाती है। इसका शिकार बना बर्फीला पिंड, एक एक्सो-प्लूटो  माना जाता है कि उस तारे के अपने काइपर बेल्ट एनालॉग से आया होगा। काइपर बेल्ट हमारे सौरमंडल के बाहरी किनारे पर मौजूद बर्फीले मलबे का एक घेरा है, जहां प्लूटो जैसे बौने ग्रह और धूमकेतु स्थित हैं। जब यह बर्फीला पिंड तारे के बहुत करीब भटक गया, तो बौने तारे के तीव्र गुरुत्वाकर्षण ने इसे फाड़ दिया और इसके टुकड़ों को अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया।

इस कॉस्मिक दावत को पकड़ने और उसका विश्लेषण करने में हबल टेलीस्कोप की पराबैंगनी दृष्टि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साधारण दृश्य प्रकाश में ये अवशेष अदृश्य होते, लेकिन हबल के कॉस्मिक ओरिजिन्स स्पेक्ट्रोग्राफ ने इन टुकड़ों की रासायनिक संरचना का विश्लेषण किया।

वैज्ञानिक यह देखकर चकित रह गए कि इन मलबे के टुकड़ों में पानी की बर्फ और अन्य वाष्पशील तत्व जैसे नाइट्रोजन, कार्बन और सल्फर की मात्रा बहुत अधिक थी। विश्लेषण से पता चला कि इन टुकड़ों का 64 फीसद हिस्सा पानी की बर्फ से बना था। इतनी अधिक बर्फ की उपस्थिति ने संकेत दिया कि यह केवल एक साधारण धूमकेतु नहीं, बल्कि एक बड़ा, सुदूर बर्फीला पिंड—संभवतः एक बौने ग्रह का खंड था।

शोधकर्ताओं ने मलबे में नाइट्रोजन की रिकॉर्ड मात्रा भी पाई, जो प्लूटो की सतह पर पाई जाने वाली नाइट्रोजन बर्फ से मेल खाती है। इससे यह सिद्धांत मजबूत होता है कि यह मलबा एक प्लूटो जैसे बर्फीले पिंड की परत या मेंटल से आया था।

यह खोज खगोलविदों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें सुदूर, बर्फीले ग्रहों की निर्माण सामग्री और संरचना को समझने में अभूतपूर्व झलक देती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह दृश्य हमारे अपने सौरमंडल के संभावित भविष्य की एक भयावह झलक है। लगभग पाँच अरब वर्षों में, हमारा सूर्य भी एक सफेद बौने तारे में बदल जाएगा।

उस समय, यह फूलकर लाल दानव बन जाएगा और बुध और शुक्र जैसे आंतरिक ग्रहों को निगल जाएगा, और शायद पृथ्वी को भी भस्म कर देगा। अंततः, यह एक सफेद बौना बन जाएगा। उस समय, सूर्य का तीव्र गुरुत्वाकर्षण हमारे अपने काइपर बेल्ट में मौजूद बर्फीले पिंडों को अंदर खींचना शुरू कर सकता है, जैसा कि हबल द्वारा देखे गए इस तारे के साथ हो रहा है।

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