Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal News: बंगाल में 1 जून से महिलाओं को मिलेंगे ₹3000, शुभेंदु सरकार का 'अन्नपूर्णा भंडार' प... पीएम मोदी का वडोदरा से संबोधन: 'वर्क फ्रॉम होम' अपनाएं और सोने की खरीदारी टालें, जानें क्या है वजह Mira Bhayandar News: काशीमीरा में शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने पर बवाल, सरनाईक और मेहता आमने-सामने BRICS Meeting Delhi: दिल्ली में जुटेगा BRICS, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर होगी चर्चा Rewa News: तिलक के दौरान दूल्हे के अफेयर का खुलासा, शादी से मना करने पर लड़की पक्ष को दौड़ा-दौड़कर प... Secunderabad News: बीटेक छात्र यवन की हत्या का खुलासा, लड़की के पिता-भाई समेत 10 आरोपी गिरफ्तार UP BJP Meeting Lucknow: 2027 चुनाव का रोडमैप तैयार करेगी BJP, लखनऊ में 98 जिलाध्यक्षों की बड़ी बैठक Katihar Crime News: कटिहार में मानवता शर्मसार, नाबालिगों को खूंटे से बांधकर पीटा, सिर मुंडवाकर जबरन ... Jamshedpur Triple Murder: जमशेदपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने पत्नी और दो बच्चों को उतार... मानव को अंगों को उगाने में मदद करेगा

हवा से पत्थर तक: जलवायु परिवर्तन से लड़ते अंजीर के पेड़

जलवायु परिवर्तन के प्रतिरोध का प्राकृतिक तरीका सामने आया

  • कैसे काम करता है यह अद्भुत पाथवे

  • यह हवा से सीओ 2 को खींचता है

  • जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक नई उम्मीद

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हाल ही में हुए एक नए शोध से पता चला है कि अंजीर के पेड़ की कुछ प्रजातियाँ अपने तनों में कैल्शियम कार्बोनेट जमा करती हैं – जिससे वे आंशिक रूप से पत्थर में बदल जाते हैं। केन्याई, अमेरिकी, ऑस्ट्रियाई और स्विस वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि ये पेड़ वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड खींचकर उसे आसपास की मिट्टी में कैल्शियम कार्बोनेट चट्टानों के रूप में जमा कर सकते हैं।

केन्या के मूल निवासी ये पेड़, पहले फलदार वृक्षों में से एक हैं जिनमें यह अनूठी क्षमता पाई गई है, जिसे ऑक्सालेट कार्बोनेट पाथवे के नाम से जाना जाता है। यह खोज जलवायु परिवर्तन से निपटने के नए और प्राकृतिक तरीकों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

देखें इससेे संबंधित वीडियो

ऑक्सालेट कार्बोनेट पाथवे एक जटिल जैव-रासायनिक प्रक्रिया है। इसमें अंजीर के पेड़ पहले वायुमंडल से सीओ 2 को अवशोषित करते हैं, जैसा कि अन्य पौधे प्रकाश संश्लेषण के दौरान करते हैं। हालांकि, इन विशेष अंजीर प्रजातियों में, सीओ 2 को बाद में ऑक्सालेट में परिवर्तित किया जाता है।

यह ऑक्सालेट फिर कैल्शियम के साथ मिलकर कैल्शियम ऑक्सालेट बनाता है, जो पेड़ के तने और जड़ों में जमा हो जाता है। समय के साथ, यह कैल्शियम ऑक्सालेट रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से कैल्शियम कार्बोनेट में बदल जाता है, जो चूना पत्थर का मुख्य घटक है। इस प्रक्रिया से, पेड़ न केवल अपने स्वयं के ऊतकों को मजबूत करते हैं, बल्कि वे अतिरिक्त कैल्शियम कार्बोनेट को आसपास की मिट्टी में भी छोड़ते हैं, जिससे मिट्टी में कार्बन का भंडारण होता है।

यह प्राकृतिक प्रक्रिया, जिसे बायोमिनरलाइज़ेशन भी कहते हैं, पृथ्वी के कार्बन चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालाँकि, अंजीर के पेड़ों की यह क्षमता विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि यह सीओ 2 को वायुमंडल से स्थायी रूप से हटाकर उसे एक स्थिर खनिज रूप में बदल देती है। यह कार्बन को वायुमंडल में वापस जाने से रोकता है, जिससे यह ग्रीनहाउस गैस के रूप में कार्य नहीं कर पाता।

जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती है जिसके लिए अभिनव समाधानों की आवश्यकता है। जीवाश्म ईंधन के जलने और वनों की कटाई के कारण वायुमंडल में सीओ 2 का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और चरम मौसम की घटनाएँ घटित हो रही हैं। इस संदर्भ में, अंजीर के पेड़ों की यह क्षमता एक आशा की किरण प्रदान करती है।

इस शोध के निहितार्थ दूरगामी हो सकते हैं। यदि इन पेड़ों को बड़े पैमाने पर लगाया जाए, तो वे वायुमंडल से सीओ 2 को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह न केवल कार्बन कैप्चर में मदद करेगा, बल्कि यह मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि कैल्शियम कार्बोनेट मिट्टी की संरचना और उर्वरता में सुधार करता है। इसके अलावा, चूंकि ये फलदार वृक्ष हैं, इसलिए ये स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक लाभ भी प्रदान कर सकते हैं, जिससे इन पेड़ों के संरक्षण और रोपण को और प्रोत्साहन मिलेगा।

वैज्ञानिक अब इस प्रक्रिया को और गहराई से समझने और यह आकलन करने पर काम कर रहे हैं कि इसे बड़े पैमाने पर कार्बन हटाने की रणनीति के रूप में कैसे उपयोग किया जा सकता है। यह शोध टिकाऊ और प्राकृतिक समाधानों की तलाश में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है जो हमारे ग्रह को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने में मदद कर सकते हैं।