महिलाओं और बच्चों समेत 300 से ज़्यादा मारे गए
खार्तूमः गृहयुद्ध की विभीषिका झेल रहे सूडान में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, और हालिया घटनाक्रम ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। विद्रोही अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) ने उत्तरी कोर्डोफन प्रांत में एक नृशंस नरसंहार को अंजाम दिया है, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित 300 से ज़्यादा निर्दोष नागरिक बेरहमी से मार दिए गए। यह घटना सूडान के दो प्रतिद्वंद्वी जनरलों, जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और जनरल मोहम्मद हमदान दागालो के बीच अप्रैल 2023 में शुरू हुए संघर्ष की भयावहता को दर्शाती है।
कुछ महीने पहले, जब राजधानी खार्तूम पर आरएसएफ का कब्ज़ा हो गया था, तब सूडानी सेना की सीधी देखरेख में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया था। इस नए घटनाक्रम ने आरएसएफ को घेर लिया और उन्हें एक हताशापूर्ण जवाबी कार्रवाई का रास्ता अपनाने पर मजबूर कर दिया।
इसी बौखलाहट में उन्होंने उत्तरी कोर्डोफन प्रांत के बारा कस्बे और आसपास के गाँवों पर हमला किया, जहां उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी और हिंसा के ज़रिए सैकड़ों लोगों की जान ले ली। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के बाद इलाके के हज़ारों निवासी अपनी जान बचाने के लिए पलायन कर गए हैं, जिससे मानवीय सहायता की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
सूडानी सेना के प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और देश के अर्धसैनिक बल आरएसएफ के प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान दागालो (जो हेमेती के नाम से भी जाने जाते हैं) के बीच की यह लड़ाई पिछले तीन सालों से जारी है। इन दोनों जनरलों पर मानवाधिकार उल्लंघन, लूटपाट, अत्याचार और बलात्कार में सहायता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस गृहयुद्ध ने सूडान को एक अथाह संकट में धकेल दिया है, जिसमें हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है और 1.2 करोड़ से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
मई की शुरुआत में आरएसएफ द्वारा राजधानी खार्तूम पर कब्ज़ा करने के बाद, जनरल बुरहान ने पूर्व संयुक्त राष्ट्र अधिकारी अल-तैयब इदरीस अब्देल हाफ़िज़ को सूडान का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जिससे एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ। तब से, सूडानी सेना ने पिछले कुछ महीनों में जनरल दागालो की सेना को और ज़्यादा इलाकों से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।
माना जा रहा है कि शहर पर फिर से कब्ज़ा करने की बेताब कोशिश में, आरएसएफ बलों ने सोमवार रात बारा कस्बे में यह क्रूर नरसंहार किया। सूडान में जारी यह संघर्ष और हालिया नरसंहार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गहरी चिंता का विषय है। लाखों लोगों की जान खतरे में है और मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है। क्या इस भयावह स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप संभव होगा?