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गाजा युद्ध में नरसंहार से नाराज इजरायली सैनिक

बारह हजार से अधिक सैनिकों ने नेतन्याहू के खिलाफ पत्र लिखा

तेल अवीवः पिछले कुछ हफ्तों में, इजरायली सेना (आईडीएफ) के 12,000 से अधिक रिजर्व सदस्यों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लड़ाई समाप्त करने और 59 इजरायली बंधकों को वापस करने के लिए एक समझौते पर पहुंचने का आह्वान किया गया है।

18 महीने पहले जब गाजा में नरसंहार शुरू हुआ था, तब लगभग सभी इजरायली नागरिकों ने नेतन्याहू के फैसले का समर्थन किया था। पूरा देश सरकार के इस वादे पर विश्वास करता है कि हमास को पराजित किया जाएगा और बंधकों को छुड़ा लिया जाएगा। जनवरी में जब हमास और इजरायल ने युद्ध विराम प्रस्ताव पर सहमति जताई तो कई लोगों ने मान लिया कि इसका मतलब युद्ध का अंत हो गया है। लेकिन मार्च के मध्य में इजराइल ने युद्धविराम तोड़ दिया और नरसंहार पुनः शुरू कर दिया।

इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद के पूर्व प्रमुख डैनी याटोम ने बताया, हम समझते हैं कि इज़रायल बहुत बुरी दिशा में जा रहा है। यह भी समझा जा रहा है कि नेतन्याहू अपने हितों से इतर किसी भी चीज़ के बारे में नहीं सोच रहे हैं। बंधकों को वापस लाना उनकी पहली प्राथमिकता कभी नहीं थी। उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर उनके अपने हित तथा इस सरकार को बनाये रखने की चिंताएं हैं।

हालिया पत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले कई लोग, जैसे याटोम, लंबे समय से नेतन्याहू के आलोचक रहे हैं। वे अक्टूबर 2023 में हमास के हमले से पहले भी सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे थे। पिछले महीने नेतन्याहू को कई बार खुले पत्र भेजे गए हैं, जिनमें से पहला अप्रैल के आरंभ में प्रकाशित हुआ था। इस पर इज़रायली वायु सेना के 1,000 रिजर्व सदस्यों और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने हस्ताक्षर किये।

उस पत्र में उन्होंने लिखा था, जिन लक्ष्यों के लिए युद्ध शुरू किया गया था, वे अब युद्ध जारी रखने से हासिल नहीं होंगे। इसके विपरीत, यह बंधकों को मौत की ओर धकेल देगा। उन्होंने युद्ध को समाप्त करने का आह्वान किया, क्योंकि माना जाता है कि गाजा में 24 बंधक अभी भी जीवित हैं।

पत्र में कहा गया है, प्रत्येक बीतते दिन के साथ, उनका जीवन अधिक जोखिम में पड़ता जा रहा है। अगले कुछ सप्ताहों में इज़रायली सेना (आईडीएफ) की लगभग सभी शाखाओं के अधिकारियों ने ऐसे पत्रों पर हस्ताक्षर किये। कुल मिलाकर, 12,000 से अधिक अधिकारियों ने इन पत्रों पर हस्ताक्षर किये।