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असम से मिजोरम तक हाहाकार, बारह नदियां खतरे के निशान से ऊपर

पूर्वोत्तर में बाढ़-भूस्खलन में 44 से ज्यादा मौतें

  • केंद्रीय गृह सचिव मणिपुर के दौरे पर

  • असम में 132 सालों का रिकार्ड टूटा

  • म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने की समीक्षा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: जब देश के अधिकांश हिस्से लू और हीटवेव से जूझ रहे हैं, तब पूर्वोत्तर भारत पानी में डूब रहा है। जून की शुरुआत से ही सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के राज्य बाढ़, भारी बारिश और भूस्खलन के कारण आपदा के हालात में पहुंच चुके हैं।

ब्रह्मपुत्र और बराक समेत दस से ज्यादा नदियां उफान पर हैं, जिनका जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। अब तक 44 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और सैकड़ों गांव कटाव की चपेट में हैं। सिक्किम के लाचेन क्षेत्र में सेना का एक कैंप भूस्खलन की चपेट में आ गया।

हादसे में तीन जवानों की मौत हो चुकी है और छह अब भी लापता हैं. चार जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया है। असम के सिलचर में 3  जून को रिकॉर्ड 415.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 132 साल में एक दिन की सबसे अधिक बारिश है। इस तबाही ने 1893 का 290.3 मिमी का रिकॉर्ड तोड़ दिया। राज्य के 19 जिलों में 3.64 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं। गांवों में पानी घुस गया है, सड़कें कट चुकी हैं और ट्रेनों की आवाजाही रुक गई है।

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय केंद्रीय दल ने आज  मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में दो राहत शिविरों का दौरा किया और हिंसा से प्रभावित विस्थापित लोगों की स्थिति का जायजा लिया। टीम ने विस्थापित लोगों के देखभालकर्ताओं की चिंताओं और सुझावों को सुना तथा उन्हें सरकार द्वारा निरंतर सहायता दिए जाने का आश्वासन दिया।

इसके अलावा, एक अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल और केंद्रीय गृह सचिव ने सोमवार देर रात उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कीं और चर्चा राज्य से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही, जिसमें  मणिपुर के साथ 398 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर चल रहे बाड़ लगाने के काम और राज्य में समग्र कानून एवं व्यवस्था की स्थिति शामिल है।

अधिकारी ने बताया, समीक्षा बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा पर बाड़ लगाने की प्रगति और राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और विकास संबंधी प्रयास इन बैठकों के मुख्य बिंदु रहे।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने पिछले साल मणिपुर के टेंग्नौपाल जिले के मोरेह कस्बे के पास भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेज कर दिया है।

दूसरी और, आगामी 2026 मैं होने वाले असम विधानसभा निर्वाचन को नजर रखते हुएलोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने मंगलवार को असम कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार संभाला और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। निवर्तमान अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा, जिन्होंने तीन साल से अधिक समय तक राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी का नेतृत्व किया, ने नए अध्यक्ष गौरव गोगोई को सत्ता सौंप दी।

कार्यभार संभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए गोगोई ने कहा कि पार्टी समानता और समावेशिता की विचारधारा से प्रेरित होती रहेगी। उन्होंने कहा, मैं महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से लेकर हितेश्वर सैकिया और तरुण गोगोई जैसे नेताओं की विचारधारा से प्रेरित हूं और हम साथ मिलकर पार्टी को आगे ले जाएंगे।