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कई नये प्रश्नों का उत्तर मिलना चाहिए

पहले केंद्र सरकार ने कहा कि वहां सिर्फ अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा के इंतजाम किये जाते थे। इसलिए जब बैसरन के घास के मैदान में आतंकी हमला हुआ तो सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे।

देश ने सरकार के इस बयान को स्वीकार तो किया पर नया सवाल यह खड़ा हुआ कि पर्यटकों के लिए कश्मीर जाना तो सालों भर चलता है। वैसी स्थिति में सुरक्षा के इंतजाम कैसे होते हैं। इससे आगे बात निकली तो पता चला कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पहलगाम के एक होटल में शानदार पार्टी का आयोजन किया था।

इस पार्टी के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। इससे और आगे बात निकली तो पता चला कि बैसरन मैदान में जाने वाले पर्यटकों को फीस का भुगतान करना पड़ता था जो सीधे सरकार के खाते में जाता है।

यानी सरकार फीस लेकर रसीद काटने तक की ही जिम्मेदारी निभाती थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक वहां पर कुछ दिन पहले तक तो सुरक्षा बल की गश्ती हो रही थी।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आतंकवादी किस रास्ते से वहां आये थे। इससे अलग इजरायल के राजदूत का बयान है, जिन्होंने इसके साथ हमास के संबंधों की बात कहते हुए कहा कि हमास के लोग अक्सर ही पाकिस्तान आते जाते थे।

अब इजरायल पर हुए हमास के हमले और पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बीच एक समानता यह है कि आतंकवादी घटना को कैमरे में कैद कर रहे थे। दोनों ही मामलों में ऐसा हुआ है, यह प्रमाणित सत्य है।

लिहाजा इन सवालों का उत्तर देने की जिम्मेदारी तो केंद्र सरकार की ही है। इस बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले को लेकर रविवार को पाकिस्तान पर तीखा हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए थे,

उन्होंने कहा कि उन्होंने देश के नागरिकों को उनकी जमीन पर मारकर आईएसआईएस की तरह काम किया। महाराष्ट्र के परभणी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने आगे कहा कि पाकिस्तान परमाणु शक्ति होने का दावा नहीं कर सकता है और फिर बिना किसी परिणाम के निर्दोष लोगों की हत्या कर सकता है।

पाकिस्तान हमेशा परमाणु शक्ति होने की बात करता है; उन्हें यह याद रखने की जरूरत है कि अगर

वे किसी देश में घुसकर निर्दोष लोगों को मारते हैं, तो वह देश चुप नहीं बैठेगा। ओवैसी ने कहा, सरकार कोई भी हो, हमारी ज़मीन पर हमारे लोगों को मारकर और उन्हें धर्म के आधार पर निशाना बनाकर आप किस दीन की बात कर रहे हैं? आपने आईएसआईएस की तरह काम किया है।

2019 के पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक आतंकी घटनाओं में से एक में, 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने पहलगाम के पास सुरम्य बैसरन घास के मैदान में 26 लोगों, जिनमें ज़्यादातर पर्यटक थे, की गोली मारकर हत्या कर दी।
इस बीच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, जिसकी टीमें हमले के दिन से ही इस क्षेत्र में मौजूद हैं, ने रविवार को औपचारिक रूप से आतंकी हमले की जांच अपने हाथ में ले ली।
एनआईए ने अपने बयान में कहा कि पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार घटनाओं के पूरे क्रम को एक साथ जोड़ने में मदद करने के लिए चश्मदीदों से बारीकी से पूछताछ की जा रही है।
इस बीच, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तब से बढ़ रहा है जब से नई दिल्ली ने इस्लामाबाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया है।
23 अप्रैल को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी  की बैठक के बाद, केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। पाकिस्तान के साथ तनाव कम करने के लिए अटारी सीमा पर एकीकृत चेक पोस्ट को बंद कर दिया गया तथा पाकिस्तानी नागरिकों को जारी सभी वीज़ा रद्द कर दिए गए।
इसलिए बदले की कार्रवाइयों के बीच आतंकी हमला के पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। आतंकवादी अगर पाकिस्तान से आये तो वह किस रास्ते से आये।
उन्हें यहां तक पहुंचने में किस किस माध्यम से मदद मिली और घटना के बाद वे किस ओर चले गये हैं और उनके कैमरे में कैद वीडियो को कहां कहां पहुंचाया गया है।
भीषण आतंकी हमले का एक भारतीय सच यह भी है कि ऐसी घटनाओँ के बाद देश में जो आक्रोश भड़कता है, उसमें कई जरूरी सवाल दब जाते हैं क्योंकि उग्र राष्ट्रवाद का लबादा ओढ़े लोग ऐसे प्रश्नों को भी राष्ट्रविरोधी करार देते हैं।
लेकिन सच की एक विशेषता यह भी है कि उसे अगर लोहे के संदूक में बंद कर समुद्र में भी डूबा दिया जाए तो कुछ समय के बाद वह अपने आप ही ऊपर आ जाता है। लिहाजा उल्लेखित सवालों का उत्तर तो मिलना चाहिए ताकि देशवासियों को पूरे घटनाक्रम के असली सत्य  का पता चल सके।