Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
सारंगढ़ के उफनते घोघरा नाले में बही कार! पति-पत्नी लापता, चालक ने कूदकर बचाई जान जांजगीर में नशे में धुत युवक पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ा, नीचे कूदने की धमकी से मचा हड़कंप राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने रचा इतिहास! राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जीता रजत पदक, उठाया 199... कोरबा में किस्तों पर ली बाइक चोरी होने पर युवक ने की खुदकुशी! परिजनों ने पुलिस पर लगाए लापरवाही के आ... रायपुर में 5 हजार मीटर रीडरों का जोरदार प्रदर्शन, पूर्व CM भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में डंगनिया बि... एमसीबी के चिरमिरी में रिहायशी इलाके में घुसा जंगली भालू, घर लौट रहे युवक पर किया जानलेवा हमला बलौदाबाजार की सीमेंट कंपनियों पर बरसे शैलेश नितिन त्रिवेदी; बाहरी लोगों को नौकरी देने और स्थानीय छंट... 'विकसित छत्तीसगढ़ विजन 2047' के तहत प्रदेश बनेगा देश का अग्रणी स्पोर्ट्स हब, डिप्टी सीएम अरुण साव ने... छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर पर CSPDCL का बड़ा सर्वे! जुलाई में 28 से 53% तक घटी बिजली खपत, भ्रांतियां... रायपुर में साइबर ठगी की रकम से खरीदे सोने के सिक्के, पुलिस ने 3 शातिर आरोपियों को किया गिरफ्तार

यूपी में कानून का शासन ध्वस्तः सुप्रीम कोर्ट

सिविल मामलों को क्रिमिनल केस बनाने से नाराजगी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सिविल मामले को आपराधिक मामले में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि इससे पता चलता है कि कानून का शासन पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि सिविल मामले को आपराधिक मामले में बदलना स्वीकार्य नहीं है।

पुलिस द्वारा सिविल मामलों में दर्ज की गई एफआईआर को देखने के बाद, पीठ ने पूछा, सिर्फ इसलिए कि सिविल मामलों में लंबा समय लगता है, आप एफआईआर दर्ज करेंगे और आपराधिक कानून लागू कर देंगे! अधिकारियों के आचरण की आलोचना करते हुए, पीठ ने कहा, उत्तर प्रदेश में जो हो रहा है वह गलत है। हर रोज सिविल मुकदमों को आपराधिक मामलों में बदला जा रहा है। अदालत ने कहा कि यह बेतुका है और यह स्पष्ट किया कि सिर्फ पैसे न देने को अपराध नहीं बनाया जा सकता।

पीठ ने कहा कि वह जांच अधिकारी (आईओ) को गवाह के कठघरे में आने का निर्देश जारी करेगी और अधिकारी गवाह के कठघरे में खड़े होकर आपराधिक मामला बनाएंगे और आईओ को सबक सीखना चाहिए। पीठ ने राज्य के वकील से कहा, आप आरोपपत्र दाखिल करने का यह तरीका नहीं अपनाते।

अदालत ने डीजीपी और गौतमबुद्ध नगर जिले के एक थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर से खास सवाल पूछे। पीठ ने इन अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि दीवानी विवाद में आपराधिक कानून क्यों लागू किया गया। शीर्ष अदालत ने नोएडा के सेक्टर-39 में संबंधित पुलिस थाने के आईओ को गवाह के कठघरे में पेश होने और यह बताने का निर्देश दिया कि मामले में एफआईआर दर्ज करने की क्या जरूरत थी।

अदालत आरोपी देबू सिंह और दीपक सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे वकील चांद कुरैशी के जरिए दाखिल किया गया था। याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार करने के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने नोएडा की निचली अदालत में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने का फैसला किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उनके खिलाफ चेक बाउंस का मामला जारी रहेगा। नोएडा में दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 506 और 120बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।