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अडाणी का ड्रोन परीक्षण में फेल हुआ

कांग्रेस का आरोप अब परीक्षण में सही साबित

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा निर्मित दृष्टि 10 स्टारलाइनर ड्रोन भारतीय नौसेना को सौंपे जाने से पहले गुजरात के पोरबंदर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दृष्टि 10 स्टारलाइनर अनमैन्ड एरियल व्हीकल इजरायली तकनीक का इस्तेमाल करके इस देश में बनाया जाने वाला अडाणी समूह का पहला ड्रोन है।

मध्यम ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम इस शक्तिशाली ड्रोन का इस्तेमाल नौसेना पहले से ही निगरानी के लिए कर रही है। दृष्टि 10 स्टारलाइनर को पिछले वर्ष बल के निगरानी अभियानों में शामिल किया गया था। इस कंपनी द्वारा बनाया गया एक और ड्रोन पिछले साल दिसंबर में आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे समुद्री अभियानों में शामिल होने के लिए हैदराबाद से पोरबंदर भेजा गया था। सूत्रों ने बताया कि नौसेना को सौंपे जाने से पहले परीक्षण उड़ान के दौरान यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने उद्योगपति गौतम अडाणी की कंपनी द्वारा ड्रोन खरीदे जाने को लेकर सवाल उठाए थे। प्रधानमंत्री मोदी के करीबी इसके अलावा सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स भी ड्रोन बनाती हैं। इसके बावजूद ड्रोन बनाने का काम इजरायल की एल्बिट सिस्टम्स और अडाणी ग्रुप के संयुक्त उपक्रम को दिया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अडाणी ग्रुप ने इजरायल से चार हर्मीस-900 ड्रोन के पुर्जे आयात किए, उन्हें जोड़ा और नाम दिया ड्रोन दृष्टि-10 स्टारलाइनर्स रखे गए हैं। उन्होंने सिर्फ ड्रोन का एयरफ्रेम बनाया है।

दुर्घटनाग्रस्त ड्रोन को संबंधित एजेंसी द्वारा बरामद कर लिया गया है। अडाणी समूह ने अभी तक इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया है। उम्मीद जताई जा रही थी कि यह ड्रोन तट पर निगरानी बढ़ाने में नौसेना के लिए खास संपत्ति बन सकता है। नौसेना को इस ड्रोन के मिलने से समुद्र में दुश्मन के जहाजों या समुद्री डाकुओं के जहाजों पर निगरानी रखने में सुविधा होगी।

यह ड्रोन किसी भी वातावरण में प्रभावी है और तूफानों का भी सामना करने में सक्षम है। यह निर्माता का दावा है। दृष्टि 10 स्टारलाइनर ड्रोन मध्यम ऊंचाई पर 36 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। इतना ही नहीं, यह ड्रोन 450 किलोग्राम का भार भी ले जाने में सक्षम है। नौसेना और सेना ने खुफिया और निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तत्काल आधार पर दो ड्रोन का ऑर्डर दिया था।

मंगलवार को दूसरा ड्रोन कथित रूप से परीक्षण में असफल रहा। रक्षा मंत्रालय का दावा है कि द्रषि 10 स्टारलाइनर नौसेना के लिए भारत में बनाया गया पहला निगरानी ड्रोन है। इस स्वायत्त ड्रोन को अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह उपकरण विशेष रूप से युद्धक्षेत्र के साथ-साथ हवाई निगरानी के लिए भी उपयुक्त है।

प्रत्येक ड्रोन की कीमत 145 करोड़ रुपये है। अडाणी समूह पहले ही रक्षा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में कदम रख चुका है। उन्होंने छोटे आग्नेयास्त्रों से लेकर मध्यम दूरी के ड्रोन, रडार, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रौद्योगिकी तक हर चीज पर काम करना शुरू कर दिया है। अडाणी ने देश की पहली निजी ड्रोन निर्माण फैक्ट्री बनाई है।