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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर अडाणी समूह को क्लीन चिट

डेढ़ साल के बाद अंततः सेबी की रिपोर्ट जारी की गयी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीःअमेरिकी स्टॉक एनालिस्ट फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा भारतीय अरबपति गौतम अडाणी की कंपनी पर लगाए गए अनियमितताओं के आरोप निराधार हैं। दो साल बाद, भारत के बाजार नियामक सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने अडाणी समूह को क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने कहा कि अडाणी समूह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

गत 25 जनवरी, 2023 को हिंडनबर्ग ने अडाणी बंधुओं के खिलाफ एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें दावा किया गया कि अडाणी समूह एक दशक से भी अधिक समय से अपनी पंजीकृत कंपनियों के शेयर मूल्यों में हेरफेर कर रहा था। सेबी के नियमों को दरकिनार करने के लिए, उन्होंने विदेशी कंपनियों के माध्यम से अपनी कंपनी के शेयर खरीदे।

इसका उद्देश्य अतिरिक्त नियंत्रण बनाए रखना था। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद, न केवल देश में, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी अडाणी की किरकिरी हुई। उनकी कंपनियों के शेयरों में गिरावट शुरू हो गई। दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में भी अडाणी का नाम काफी नीचे चला गया। सेबी अडाणी बंधुओं पर लगे आरोपों की जाँच कर रहा था।

ढाई साल की गहन जाँच के बाद, उन्होंने गुरुवार को दो भागों में एक विस्तृत बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि अडाणी समूह पर लगाए गए इनसाइडर ट्रेडिंग, बाज़ार में हेरफेर और शेयर बाज़ार के नियमों के उल्लंघन के सभी आरोप निराधार साबित हुए हैं।

हिंडनबर्ग ने दावा किया था कि अडाणी बंधुओं ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एडिकॉर्प एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स प्राइवेट लिमिटेड और रेहवर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनियों का इस्तेमाल किया। लेकिन सेबी ने कहा कि जिस समय इन कंपनियों के ज़रिए लेन-देन हुआ, उस समय इससे संबंधित कोई क़ानून नहीं था।

नतीजतन, क़ानून का उल्लंघन नहीं हुआ। बाद में क़ानून में संशोधन किया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सेबी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अडाणी बंधुओं ने सभी ऋण चुका दिए थे, आवंटित धन का सही जगह इस्तेमाल किया था और कहीं भी कोई अनियमितता नहीं की थी। इसलिए, उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप निराधार हैं।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के कारण अडाणी समूह को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। लगभग 13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अडाणी शुरू से ही इन आरोपों को निराधार बताते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले में एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया गया था। अडाणी के खिलाफ उनकी जाँच के नतीजे भी सेबी जैसे ही थे।

उस पैनल को भी अनियमितताओं के कोई सबूत नहीं मिले। गुरुवार को सेबी द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के बाद गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमने हमेशा कहा है कि हिंडनबर्ग के दावे निराधार हैं। सेबी ने भी इतने दिनों की जाँच के बाद यही कहा है। पारदर्शिता और ईमानदारी अडाणी समूह की संपत्ति है। इस फर्जी रिपोर्ट के कारण जिन लोगों को नुकसान हुआ है और जिन्होंने पैसा गंवाया है, उनके लिए हमें गहरा खेद है। इस तरह से फर्जी खबरें फैलाने वालों को देश से माफी मांगनी चाहिए। हम भारत के लोगों के लिए हमेशा प्रतिबद्ध हैं।”