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डेपसांग में गश्त को लेकर कोई बाधा नहीं: सेना

अखबार में प्रकाशित खबर के बाद मची हलचल पर सफाई आयी

  • अंग्रेजी दैनिक में छपा थी खबर

  • सेना ने इस रिपोर्ट को काल्पनिक कहा

  • गलवान घाटी के संघर्ष के बाद तनाव था

राष्ट्रीय खबर

नयी दिल्लीः भारतीय सेना ने बुधवार को स्पष्ट किया कि भारत और चीन के सैनिक पूर्वी लद्दाख के डेपसांग  में गश्त के बारे में बनी आम सहमति का पालन कर रहे हैं और किसी भी पक्ष की ओर से इसमें बाधा उत्पन्न नहीं की जा रही है।  सेना ने एक अंग्रेजी  दैनिक में डेपसांग में गश्त बहाल करने पर बातचीत बाधित हुई शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर स्पष्टीकरण  जारी करते हुए कहा कि गत 21 अक्टूबर को बनी सर्वसम्मति के आधार पर, दोनों पक्षों ने प्रभावी ढंग से सैनिकों को पीछे हटाया है ।

भारतीय पक्ष ने अपने पारंपरिक गश्त वाले क्षेत्रों में गश्त फिर से शुरू कर दी है। दोनों पक्ष आम सहमति का पालन कर रहे हैं और किसी भी पक्ष द्वारा कोई बाधा उत्पन्न नहीं की गई है। सेना ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि इस अंग्रेजी दैनिक में बुधवार को प्रकाशित  लेख काल्पनिक और तथ्यों से परे है। सेना ने मीडिया से अनुरोध किया है कि  वह ऐसे संवेदनशील लेख प्रकाशित करने से पहले तथ्यों को सत्यापित कर लें।

उल्लेखनीय है की अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित खबर में कहा गया है कि गश्त के तौर तरीकों को लेकर भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत में गतिरोध उत्पन्न हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच करीब साढ़े चार वर्षों के गतिरोध के बाद 21 अक्टूबर को गश्त व्यवस्था को लेकर आम सहमति बनी थी,  जिसके बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाया था और डेपसांग तथा डेमचोक दोनों क्षेत्रों में अगस्त शुरू हो गई थी।

गलवान घाटी के जानलेवा संघर्ष के बाद काफी समय तक दोनों देशों की सेनाएं इन इलाकों में एक दूसरे के खिलाफ मोर्चाबंदी किये हुए थी। लंबी प्रक्रिया के बाद अंततः यहां का मुद्दा सुलझाया गया है। जिसके बाद चीन की सेना अपने निर्माणों को ध्वस्त कर पीछे लौट गयी है। जिसकी पुष्टि सैटेलाइट चित्रों से भी हो चुकी है।