Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Saharanpur Encounter: 1.25 लाख का इनामी कुख्यात अपराधी ललन सिंह ढेर; वाराणसी में सब-इंस्पेक्टर की हत... NEET UG 2026 Paper Leak: बिहार में सॉल्वर गैंग का बड़ा पर्दाफाश; 7 सॉल्वर और 14 बायोमेट्रिक कर्मियों... Odisha Miracle Birth: चलती ट्रेन में पहला बच्चा, एम्बुलेंस में दूसरा; जुड़वां बच्चों के जन्म से हैरा... Ram Mandir Trust Investigation: जमीन खरीद और दान में हेराफेरी पर SIT का बड़ा खुलासा; मंदिर प्रबंधन के... Pankaj Tripathi Brother Attacked: गोपालगंज में अभिनेता पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई पर जानलेवा हमला; गं... Jalore Railway Station: बीकानेर-साबरमती एक्सप्रेस के पहले सफर पर छाए जालोर के बेटे तेज कुमार; परिजनो... Nagarasu Gurudwara Dispute: रुद्रप्रयाग में गुरुद्वारे पर कब्जे को लेकर तनाव; निहंगों का डेरा, 36 घं... Weather Forecast Today: मानसून की सक्रियता और लू का डबल अटैक; दिल्ली, यूपी और बिहार के लिए मौसम विभा... अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की परिकल्पना, देखें वीडियो राम मंदिर से दान का साठ किलो चांदी गायब

हथियार डालने वालों को चार लाख का फिक्स्ड डिपोजिट

  • मुख्यमंत्री  ने कहा मोदी के मिशन में 1,182 लोग शामिल

  • पिछले साल में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे

  • मुख्यमंत्री ने उल्फा (आई) से बातचीत की अपील की

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम ने शांति की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। विभिन्न आदिवासी विद्रोही संगठनों के हजारों लोगों ने गुरुवार को हुए एक कार्यक्रम में हिंसा का रास्ता छोड़ शांति का रास्ता अपना लिया। समारोह गुवाहाटी के पंजाबरी इलाके में श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में आयोजित किया गया था, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भाग लिया।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उत्तर पूर्व में शांति और प्रगति के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन में करीब 1,182 लोग शामिल हुए हैं। इन्होंने हथियार और गोला-बारूद त्याग कर शांति का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों का तहे दिल से स्वागत करते हैं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पांच आदिवासी उग्रवादी समूहों ने हथियार डाल दिए। गौरतलब है, इन समूहों ने पिछले साल सितंबर में केंद्र और असम सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था।

आत्मसमर्पण करने वाले सदस्य उग्रवादी ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी (एएएनएलए), बिरसा कमांडो फोर्स (बीसीएफ), संथाल टाइगर फोर्स (एसटीएफ), आदिवासी कोबरा मिलिटेंट असम (एसीएमए) और आदिवासी पीपुल्स आर्मी (एपीए) के थे।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उल्फा (आई) से बातचीत की अपील भी की। उन्होंने कहा कि असम में जब सभी उग्रवादी गुट सक्रिय हो गए हैं, उल्फा को भी राज्य के सभी वर्गों के लोगों के हित में बातचीत के लिए आगे आना चाहिए।

सीएम सरमा द्वारा की गई प्रमुख घोषणाओं में से एक आत्मसमर्पण करने वाले 1,182 कैडरों में से प्रत्येक के लिए 4 लाख रुपये की सावधि जमा का निर्माण है। सावधि जमा 15 अगस्त, 2023 को या उससे पहले किया जाएगा, और कैडर अपना व्यवसाय शुरू करने या अन्य उद्यमों को आगे बढ़ाने के लिए जमा से 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर सकेंगे। सरकार नागरिक जीवन में उनके संक्रमण के दौरान कैडरों का समर्थन करने के लिए परामर्श सेवाएं भी प्रदान करेगी।

इसके अतिरिक्त, प्रत्येक कैडर को अगले तीन वर्षों के लिए 6,000 रुपये का मासिक वजीफा दिया जाएगा ताकि उनके दैनिक खर्चों को कवर किया जा सके।आदिवासी गांवों के सामने आने वाली बुनियादी चुनौतियों को पहचानते हुए, सीएम सरमा ने आश्वासन दिया कि सरकार इन गांवों की ओर जाने वाली सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता देगी। उन्होंने आदिवासी समुदाय के लिए स्कूलों और कॉलेजों के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) के प्रमुख परेश बरुआ से शांति के लिए वार्ता में शामिल होने की अपील की।

सीएम सरमा ने आदिवासी उग्रवादियों के साथ शांति प्रक्रिया में समर्थन और भागीदारी के लिए भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और एके मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शांति और विकास के मार्ग के लिए प्रतिबद्ध रहने के महत्व पर जोर दिया और पूर्व आतंकवादियों से उन लोगों के बहकावे में नहीं आने का आग्रह किया जो उन्हें सशस्त्र गतिविधियों में वापस लाने की कोशिश कर सकते हैं।

सीएम सरमा ने जोर देकर कहा कि आदिवासी समुदाय का विकास एक साझा जिम्मेदारी है, और उन्होंने पूर्व उग्रवादियों से विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी पहचान को संरक्षित किया जाएगा, और सरकार आदिवासी समाज के समग्र उत्थान की दिशा में काम करेगी।