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सर्वदलीय बैठक में अमित शाह ने मोदी पर सफाई दी

  • पटना की विपक्षी बैठक का असर दिखा

  • शाह ने कहा हर दिन मोदी से बात होती है

  • मुख्यमंत्री की विफलता के आरोप भी लगे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः क्या केंद्र सरकार मणिपुर को भी कश्मीर बनाना चाहती है, यह सवाल अमित शाह को परेशानी में डाल गया। दरअसल पटना की सर्वदलीय बैठक के तुरंत बाद हुई इस बैठक में विपक्ष के तेवर आक्रामक ही रहे और मुख्य तौर पर नरेंद्र मोदी की चुप्पी और वहां की  हिंसा रोकने के उपायों पर सवाल उठे। इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी को यह कहकर शांत किया कि प्रधानमंत्री से मणिपुर के बारे में हर दिन उनकी बात होती है। अमित शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशन में शांति स्थापित करने के सभी प्रयास किये जा रहे हैं।

मणिपुर के हालात पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में अमित शाह को विपक्ष के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। तृणमूल ने मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए एक सप्ताह के भीतर सभी दलों के प्रतिनिधियों को भेजने का प्रस्ताव दिया है। उनका सवाल, क्या भाजपा सरकार मणिपुर को कश्मीर बनाना चाहती है? पिछले एक महीने में विपक्ष बार-बार मणिपुर के हालात पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर चुका है।

गृह मंत्री शाह कूकी और मैतेई के मुख्य इलाकों का दौरा करने और कुछ कदम उठाने के बाद भी स्थिति नहीं बदली। ऐसे में मैतेई सामाजिक संगठनों के एक संयुक्त मंच थौबल अपुनबा लूप ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक बयान जारी कर मणिपुर में शांति लाने की मोदी सरकार की इच्छा पर सवाल उठाया। इसके बाद आनन-फ़ानन में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। शनिवार को हुई उस बैठक में सरकार को विपक्ष के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा।

सर्वदलीय बैठक में तृणमूल प्रतिनिधि सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने दावा किया कि शाह के मणिपुर दौरे के बाद हालात और खराब हो गए हैं। उनका सवाल, क्या केंद्र सरकार मणिपुर को कश्मीर बनाना चाहती है? केंद्र सरकार जल्द से जल्द गलती स्वीकार करे और सही रास्ते पर चलना शुरू करे।

बैठक में शाह ने कहा कि ऐसा कोई दिन नहीं गुजरा जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से या खुद मोदी से मणिपुर के हालात पर बात न की हो। इस संबंध में उन्हें कोई सलाह नहीं दी। भाजपा की ओर से मणिपुर के प्रभारी नेता संबित पात्रा ने बैठक के बाद पत्रकारों से यह मांग की। उन्होंने कहा कि मोदी के आदेश पर मणिपुर में शांति स्थापित करने की पूरी कोशिश की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में मणिपुर पर एक परिदृश्य प्रेजेंटेशन दिखाया गया। इसमें मणिपुर की भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि शामिल थी। लेकिन मौजूदा समस्या का समाधान कैसे किया जाए इसकी कोई रूपरेखा नहीं थी। इस बीच कांग्रेस, सपा, राजद ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग की।

उनका दावा है कि जब तक बीरेन सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री हैं, तब तक राज्य में शांति बहाल होने की कोई उम्मीद नहीं है। सर्वदलीय बैठक में मांग उठी कि प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर के मुख्यमंत्री को तुरंत बर्खास्त करें। उनकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करें जो हिंसाग्रस्त राज्य को एकजुट करने का सबसे कठिन काम कर सके।

विपक्षी नेताओं ने यह भी सवाल किया कि प्रधानमंत्री मणिपुर पर चुप क्यों हैं। बैठक में कांग्रेस, तृणमूल, सीपीएम के अलावा शिवसेना का उद्धव गुट मौजूद था। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, भाजपा सांसद और मणिपुर प्रभारी संबित पात्रा मौजूद रहे। सभी पक्षों का यह सवाल अनुत्तरित ही रहा कि अगर प्रयास हो रहे हैं तो मणिपुर 3 मई से जल क्यों रहा है। जातीय हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। हजारों लोग घायल हुए। कम से कम 50,000 लोगों ने अपने घरों के बिना राहत शिविरों में शरण ली है। सेना ने हालात पर काबू पा लिया है। लेकिन अभी भी मणिपुर में शांति बहाल नहीं हो सकी है।