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राहुल प्रकरण बैक फायर कर गया है, भाजपा की सोच

राहुल गांधी को लेकर भाजपा की आईटी सेल का काम उल्टा पड़ गया है। दरअसल चुनावी तैयारियों में जुटी भाजपा की बैठक में परोक्ष रुप से यह बात स्वीकार ली गयी है। इसी वजह से अपने आईटी सेना को खास निर्देश देने के क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को इस बारे में बोलना पड़ गया।

साथ ही यह भी निर्देश जारी किया गया कि इस आईटी सेल के लिए नये लोगों को जोड़े और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का अधिक से अधिक प्रचार करें। इससे साफ है कि इस बार भी भाजपा नरेंद्र मोदी के नाम के भरोसे ही आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है। दो दिवसीय कार्यशाला में ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम का उपयोग करने के तरीके के बारे में बताया गया।

कार्यशाला में भाग लेने वाले नेताओं में से एक ने बताया कि नड्डा ने सांसदों से अपने ट्विटर हैंडल पर चल रही सामग्री की गुणवत्ता जानने के लिए अपने सोशल मीडिया कर्मियों के साथ नियमित रूप से बातचीत करने को भी कहा। इससे साफ है कि मीडिया के बहुमत से भाजपा की दूरी की बात भी भाजपा को समझ में आ चुकी है।

कार्यशाला में भाग लेने वाले एक ने बताया आईटी सेल के प्रमुख मालवीय का भाषण तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित था, और नेटिज़न्स को कैसे जोड़े रखा जाए और आउटरीच कैसे बढ़ाया जाए। मालवीय ने खेद व्यक्त किया कि ज्यादातर सांसद ऐसी सामग्री पोस्ट करने में विफल रहते हैं जिसका बड़ा राजनीतिक प्रभाव होता है।

मालवीय ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि 2008 के जयपुर सीरियल धमाकों के एक आरोपी को हाल ही में राजस्थान में रिहा कर दिया गया था, लेकिन अधिकांश सांसद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अशोक गहलोत सरकार को घेरने के लिए इस मुद्दे को उठाने में विफल रहे।

उन्होंने सांसदों से यूट्यूब पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी कहा, जिसके दर्शकों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। आईटी सेल प्रमुख ने बताया कि बहुत कम सांसदों के पास खुद के लिए एक समर्पित यूट्यूब चैनल है। वैसे इस बार के चुनाव में भी नमो एप के जरिए प्रचार को आगे बढ़ाने की बात कही गयी।

पार्टी नेतृत्व ने बताया कि तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अलग-अलग लक्षित समूहों को संभालने के लिए किया जाना चाहिए। 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए और अधिक सोशल मीडिया स्वयंसेवकों की भर्ती करने और प्रचार शुरू होने से पहले सभी निर्वाचन क्षेत्रों में सोशल मीडिया सेल स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा और मोदी के नेतृत्व की ओर आकर्षित होने वाले राष्ट्रवादी युवाओं की ऊर्जा को इस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। पार्टी नेतृत्व ने वहां विधानसभा चुनाव से पहले पूरे गुजरात में आयोजित सोशल मीडिया कॉन्क्लेव और उत्तर प्रदेश में अपनाई गई प्रचार रणनीति की सराहना की, जिसके कारण सीएम योगी आदित्यनाथ एक ब्रांड बन गए।

वैसे इस कार्यशाला की खास बात यह रही कि सोशल मीडिया प्रमुखों को विपक्ष के हमलों का सक्रिय रूप से मुकाबला करने के लिए कहा गया था, लेकिन बिना आपा खोए। यह बताया गया था कि जब भी विपक्ष ने प्रधानमंत्री और पार्टी पर हमला किया, तो जवाबी हमला बिना शांत हुए सभ्य तरीके से होना चाहिए। यह तथ्यों और आंकड़ों के साथ होना चाहिए।

साधारण सोशल मीडिया पोस्ट की तुलना में इसकी लंबी उम्र है। भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने मंगलवार को पार्टी की सोशल मीडिया टीमों से संगठन के मूल्यों का पालन करने और राजनीतिक प्रवचन के स्तर को कम करने से बचने के लिए कहा, चाहे विपक्ष जो भी कहानी चुनता हो।

इस एक बात से साफ है कि पार्टी यह मान चुकी है कि राहुल गांधी के खिलाफ हाल का अभियान उल्टा असर छोड़ गया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि दिन भर की कार्यशाला का संचालन भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और संगठन के सोशल मीडिया और आईटी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने किया।

सत्र में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भाजपा सोशल मीडिया टीमों ने भाग लिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कैसे सोशल मीडिया समसामयिक मुद्दों पर समय पर प्रतिक्रिया देने का प्राथमिक साधन बन गया है।

भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने राज्य की टीमों को सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के पार्टी के मूल्यों का पालन करने का आह्वान किया और उनसे कहा कि वे राजनीतिक प्रवचन के स्तर को कम करने में लिप्त न हों, भले ही विपक्ष कोई भी कहानी चुनता हो। स्पष्ट है कि भाजपा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए सूचना प्रसार के स्तर पर कमर कसकर तैयार है। इन तैयारियों से यह प्रतीत होता है कि राहुल की भारत जोड़ो यात्रा के बाद के घटनाक्रमों ने भाजपा को नये सिरे से सोचने पर मजबूत कर दिया है।