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एक पुलिस शिकायत से निकला एक्टिव एकर्स की गड़बड़ियों का पुलिंदा

कोलकाताः कोलकाता का अन्यतम आवासीय कॉलोनी अपने संचालकों की कारगुजारियों की वजह से विवादों से घिरता जा रहा है। यूं तो आंकड़ों के मुताबिक इस हाउसिंग कॉलोनी में 720 फ्लैट बने हुए हैं। इतने फ्लेटों के होने के बाद भी यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह करीब दस गांवों के बराबर इलाके में है।

ईस्टर्न बाईपास जैसे सड़क पर यह आवासीय कॉलोनी प्रसिद्ध होटल जेके मैरियट के पास बहुत महत्वपूर्ण इलाका में है। इस सोसायटी के संचालन में तरह तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। चिंता का विषय यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा ऐसी सोसायटियों की देखरेख के लिए गठिन कंपिटेंट ऑथरिटी भी इन पर आंख मूंदे हुए हैं।

इस कंपिटेंट ऑथरिटी को ऐसी सोसायटियों में होने वाली गड़बड़ियों पर कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। इस आवासीय कॉलोनी की संचालन समिति के कई लोग यह दावा करते हैं कि उनलोगों ने अपनी तरफ से इस प्राधिकार को ही मैनेज कर रखा है। अब यह सरकार के देखने का विषय है कि इस प्राधिकार में कौन कौन लोग ऐसी सोसायटियों के द्वारा मैनेज किये गये  हैं।

इस सोसायटी की चर्चा बाहर इसलिए होने लगी क्योंकि वहां के टेंगरा थाना में एक शिकायत दर्ज हुई थी। मिली जानकारी के मुताबिक गत 26 जनवरी को संचालन समिति की एक निर्वाचित महिला सदस्य ने आरोप लगाया कि समिति के दो पदाधिकारियों ने उन्हें धक्का दिया और उनके साथ बदतमीजी की।

शिकायत उस समय की है जब वहां पर सोसायटी के अनेक लोग झंडोत्तोलन के लिए मौजूद थे। इनमें से किसी ने ऐसी घटना को होते नहीं देखा। लेकिन इसकी शिकायत थाना में कर दी गयी है। थाना में शिकायत दर्ज होने के बाद वहां के एक सौ से अधिक लोगों ने थाना में लिखित सूचना दी है कि ऐसी कोई घटना वहां नहीं हुई थी।

मामले की चर्चा आम होने क बाद पता चला कि उक्त महिला के खिलाफ दो दिन पहले ही 14 सदस्यों ने लिखित शिकायत करते हुए उन्हें कमेटी से बाहर करने की मांग की थी। यह काम सिर्फ एसजीएम मीटिंग में किया जा सकता है।

पता चला है कि यह वही महिला हैं जो सांस्कृतिक समिति में कोषाध्यक्ष के पद पर है। इन्होंने बिना बजट के प्रावधान के तथा कमेटी द्वारा पारित किये जाने के बगैर ही लाखों रुपये खर्च किये हैं, जो नियमों का उल्लंघन है। इन्होंने स्टॉल एलाटमेंट में भी गड़बड़ियां की।

कमेटी ने इसके लिए जो दर तय किया गया था, उसके बाहर जाकर उक्त महिला ने मनमाने ढंग से अपने सगे संबंधियों तथा अन्य लोगों को स्टॉल बांट दिये। उसका हिसाब आज तक नहीं दिया गया है। यह बताने योग्य है कि इस कमेटी में ऐसे लोग भी हैं जो बैंकों के उच्चाधिकारी हैं और वे भी ऐसे कानून उल्लंघन का समर्थन कर रहे हैं।

परंपरा के मुताबिक ऐसे उच्च पदों पर बैठे लोगों को भी इस किस्म की गैरकानूनी गतिविधियों एवं गबन के आरोपों से खुद को अलग रखना चाहिए थे। सोसायटी में ऐसे लोग भी हैं, जो सरकारी कंपनियों के एजेंट हैं। उनलोगों को भी ऐसे गैरकानूनी कृत्यों से अलग रखना चाहिए था। अगर उनके संस्थानों यानी बैंक अथवा बीमा कंपनियों तक इसकी शिकायत पहुंची तो उनकी अपनी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।

इसलिए एसजीएम मीटिंग बुलाने की मांग की गयी थी। कानून के हिसाब से अध्यक्ष को पंद्रह दिनों के अंदर एसजीएम बुलाना था लेकिन उन्होंने जानबूझकर इस बैठक का आयोजन नहीं किया। यह पश्चिम बंगाल अपार्टमेंट एक्ट के विरूद्ध है।

सरकारी कानून के मुताबिक बैठकों का आयोजन वर्चुएल करने का भी प्रावधान है। इस बारे में बैठक आयोजित करने की मांग पर तीन लोगों ने इंकार कर दिया। छह लोग तटस्थ रहे और बाकी लोगों ने वर्चुएल मीटिंग करने पर सहमति जतायी है।

इस पूरी प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए वहां के अध्यक्ष ने मनमाने ढंग से बैठक बुलायी जबकि इसी दिन वर्चुअल मीटिंग की तिथि निर्धारित थी। नतीजा यह हुआ कि फिजिकल मीटिंग में मात्र आठ लोग उपस्थित हुए जबकि वर्चुअल मीटिंग में 13 लोग उपस्थित थे।

अब इस सोसायटी के अन्य गड़बड़ियों की बात भी सामने आने लगी है। पता चला है कि इस आवासीय परिसर के अंदर से काफी सारा कबाड़ अचानक गायब हो गया। सदस्यों यानी फ्लैट मालिकों द्वारा पूछताछ किये जाने पर संचालन समिति ने जो जानकारी दी, उससे पूरी समिति ही संदेह के घेरे में आ चुकी है।

यह बताया गया है कि अंदर रखा सारा कबाड़ बेच दिया गया। लोगों को बताया गया कि बिना जीएसटी के बिक्री का नगद भुगतान लिया। इससे विश्वकर्मा पूजा सहित कई मदों में खर्च किये जाने की बात की गयी है। यह अपने आप में निर्धारित कानूनों का बड़े उल्लंघन और कर वंचना का मामला बन गया, जो जीएसटी के अधिकारियों के साथ साथ पुलिस की जांच का विषय बन गया है।

मामले की खोज खबर लेने के बाद यह पता चला कि कुछ दिन पहले सोसायटी के बैंक खाता से सत्तर हजार नकद निकाला गया पूजा के मद में। बाईलॉज में इसका प्रावधान नहीं है। खबर है कि इस पैसे को अब तक वापस नहीं किया गया है और जिन्हें यह रकम दी गयी थी उन्होंने इसका हिसाब भी नहीं दिया है। कुछ लोगों की शिकायत है कि उक्त पदाधिकारी ने पैसे का हिसाब देने से भी इंकार कर दिया है।

यह भी पता चला है कि सोसायटी की आम सभा में अध्यक्ष ने खुलेआम स्वीकार किया कि उनलोगों ने वहां की मरम्मत और रंग रोगन के लिए बड़ा हुए दाम का कोटेशन लिया है ताकि इससे दूसरे काम भी कराये जा सके। यह भी नियम विरुद्ध है

सोसायटी के कर्ता धर्ता यह दावा करते हैं कि ऐसी सोसायटियों की देख रेख करने वाली संस्था एक्टिव एकर अपार्टमेंट ओनर एसोसियेशन। इन पर नजर रखने के लिए एक प्राधिकृत समिति है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर कंपीटेंटन ऑथरिटी है, जो सरकारी संस्था है।

यह संस्था हर ऐसी सोसायटियों की गतिविधियों पर नजर रखती है क्योंकि यह एक रजिस्टर्ड संस्था है। यहां के लोगों का दावा है कि उनलोगों ने इस कंपीटेंट ऑथरिटी के लोगों को मैनेज कर रखा है। इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। यह सरकार के देखने का विषय है कि इस किस्म की गड़बड़ियां सरकार की नाक के नीचे कैसे संचालित हो रही हैं और इस पर नजर रखने के लिए बनी नगर विकास विभाग की यह प्राधिकृत समिति चुप क्यों है।